Homeभारतगुजरातसूरत के शीतल रेस्टोरेंट में फूड पॉइज़निंग का शिकार हुई मासूम: AC...

सूरत के शीतल रेस्टोरेंट में फूड पॉइज़निंग का शिकार हुई मासूम: AC ऑफिस में बैठकर किश्तें वसूलने वाले भ्रष्ट हेल्थ अधिकारियों पर हत्या का केस कब दर्ज होगा?

सूरत के ‘शीतल रेस्टोरेंट’ में एक ही परिवार के लोगों को पेट भर खाना खाने के बाद भयानक फूड पॉइज़निंग का शिकार होना पड़ा, जिसमें एक मासूम बच्ची की तड़प-तड़पकर जान चली गई। लेकिन यह कोई हादसा नहीं है, यह सिस्टम और होटल मालिक की मिलीभगत से किया गया सीधा ‘मर्डर’ है। असलियत यह है कि यह सिर्फ सूरत के एक रेस्टोरेंट की बात नहीं है, पूरे गुजरात के ज़्यादातर शहरों में होटल और रेस्टोरेंट इसी तरह ज़हर परोस रहे हैं। रेस्टोरेंट मालिक मुफ़्त में खाना नहीं परोसते, जनता उनकी मेहनत का पैसा देती है। फिर ग्राहकों की थाली में बासी, सड़ा और जानलेवा खाना परोसने की यह नाकाबिलियत
क्यों? लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ करने वाले इन हरामखोरों के खिलाफ आखिर कब जनआंदोलन शुरू होगा?

क्या त्योहारों के दौरान होने वाली रेड सिर्फ ‘दिवाली पैकेट’ का दिखावा और किश्तें बढ़ाने की सेटिंग है? सबसे बड़ा और ज़रूरी सवाल फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट के उन अफ़सरों के लिए है जो AC ऑफ़िस में बैठकर सरकारी सैलरी हजम करते हैं। ये अफ़सर पूरे महीने किस गहरी नींद में सोते हैं? ये सरकारी बाबू कैमरे के सामने सैंपल लेने का ड्रामा तभी क्यों करते हैं जब कोई मासूम बच्चा या नागरिक अपनी जान गँवा देता है? क्या दिवाली या हर त्योहार पर होने वाले छापे सिर्फ़ होटल मालिकों से बड़े ‘दिवाली पैकेट’ और महीने की किश्तें वसूलने का धंधा हैं? अगर हेल्थ डिपार्टमेंट के अफ़सर हर महीने हर होटल के किचन की ईमानदारी से जाँच करते, तो आज किसी परिवार को अपनी बेटी नहीं खोनी पड़ती। अफ़सरों की यह सुस्ती, लापरवाही और भ्रष्टाचार मासूम लोगों की जान ले रहा है।

गंदा, बासी खाना और वसूली का काला धंधा

अगर आप राज्य के ज़्यादातर होटलों के किचन में कदम रखेंगे, तो आपको बहुत ज़्यादा बदबू, कीड़े, बासी पनीर, घटिया केमिकल वाला तेल और सड़ी हुई सब्ज़ियाँ दिखेंगी। हेल्थ ऑफिसर्स को यह सब पता है, लेकिन होटल मालिकों से मिलने वाली मोटी किश्तों ने उनके मुंह बंद कर दिए हैं। जनता के टैक्स से लाखों रुपये पाने वाले ये ऑफिसर्स अपनी तिजोरियां भरने के लिए जनता के पेट में धीमा ज़हर परोसने के लाइसेंस बांट रहे हैं।

गांधीनगर तक दबाव डाला जाए: रिश्वतखोर बाबुओं को सलाखों के पीछे डाला जाए।

अब सिर्फ़ नोटिस जारी करने, टेम्पररी सील लगाने या मामूली जुर्माना लगाने और कागज़ पर कार्रवाई दिखाने का ड्रामा बंद करना होगा। अगर राज्य सरकार में ज़रा भी सेंसिटिविटी बची है, तो उसे तुरंत इस मामले की हाई-लेवल जांच का आदेश देना चाहिए। सिर्फ़ रेस्टोरेंट मालिक ही नहीं, बल्कि उस इलाके के ज़िम्मेदार हेल्थ ऑफिसर और फ़ूड इंस्पेक्टर पर भी क्रिमिनल नेग्लिजेंस और ‘एग्रेवेटेड मैन्सलॉटर’ (हत्या) का केस दर्ज करके उन्हें सीधे जेल भेजा जाना चाहिए। जब ​​तक ऐसे दो-चार भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों का इंक्रीमेंट और नौकरी नहीं छीन ली जाती, ये रिश्वतखोर बाबुओं की हालत नहीं सुधरने वाली। जनता को भी अब सड़कों पर उतरकर इस काली मिलीभगत के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी होगी!

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments