पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि पूरे प्रदेश में उन्हें जगह-जगह पराली जलती हुई दिखाई दी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर पराली जल रही है, लेकिन इसे रोकने के लिए जमीन पर कोई ठोस और असरदार कदम दिखाई नहीं दे रहा है।
गोंडा: बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने प्रदेशभर में पराली जलाने की घटनाओं पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर से यात्रा के दौरान पूरे प्रदेश में जगह-जगह पराली जलती नजर आई। प्रदेश में इस तरह बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है, फिर भी इसे रोकने के लिए कोई ठोस और प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।
पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर कहा कि जिन लोगों के जिम्मे प्रदूषण रोकने की व्यवस्था है। उन्होंने इस प्रदेश और देश को लावारिस छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अब फैक्ट्री, गाड़ियों और भट्ठों पर संज्ञान लेने का समय है, लेकिन पराली के मुद्दे पर कोई सरकार संज्ञान नहीं ले रही है। बृजभूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि दीपावली के पटाखों से, भट्ठों से और उद्योगों से जितना प्रदूषण होता है, उससे 100 गुना ज्यादा प्रदूषण अकेले पराली से होता है। इसके बाद भी सबका ध्यान उधर है, पराली की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
पराली से होने वाले नुकसान
बृजभूषण शरण सिंह ने पराली जलाने से होने वाले नुकसान पर भी जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक बीघे में जितनी पराली जलती है और जितना धुआं निकलता है, उतना धुआं एक गाड़ी एक साल में भी नहीं दे पाएगी। गांव-गांव में पराली धू धू करके जल रही है। शाम के समय निकलने पर चारों तरफ आग लगी हुई नजर आती है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अगर चाहे तो 15 से 20 दिन बाद भी पता लगा सकता है कि किस खेत में पराली जली है और किसमें नहीं जली है। पराली जलाने से उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत जल जाती है, जिससे खेतों को भारी नुकसान होता है।
जागरूकता फैलाने की जरूरत
बृजभूषण शरण सिंह ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने की जरूरत है। साथ ही किसानों को ऐसे यंत्र दिए जाएं, जिनसे पराली की जुताई हो सके। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ड्रोन से निगरानी का भी कानून है, लेकिन इसका पालन कौन कर रहा है। अगर आज भी प्रशासन चाहे तो पता लगा सकता है, लेकिन छोटे से लेकर बड़े तक किसी को इस बात की चिंता नहीं है।
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार: पराली जलाने से खेत की सबसे उपजाऊ ऊपरी मिट्टी जलकर नष्ट हो जाती है। कई सेंटीमीटर तक मिट्टी के जल जाने से जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि इससे भारी मात्रा में धुआं उठता है, जो प्रदूषण को और ज्यादा बढ़ा देता है। AQI के खराब होने के लिए सिर्फ पटाखों को जिम्मेदार ठहराना गलत है, जबकि पराली जलाना इसकी बड़ी वजह है।

