वजन कांटे पर मौजूद कर्मचारियों ने पहले अंदर जाने से रोका, अनुमति लेने की बात कही; कचरा निस्तारण और प्रसंस्करण की वास्तविक व्यवस्था पर उठे सवाल
करमसद-आणंद महानगरपालिका क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था और कचरा निस्तारण की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आणंद सेवासदन की सीमा में स्थित कचरा डंपिंग साइट पर अचानक जांच के लिए पहुंचने पर वहां की व्यवस्था को लेकर कई चौंकाने वाली बातें सामने आने का दावा किया गया है। डंपिंग साइट पर कचरे के निस्तारण और प्रसंस्करण की वास्तविक स्थिति जानने के उद्देश्य से यह स्थल निरीक्षण किया गया।
डंपिंग साइट पर पहुंचने के बाद सबसे पहले मुख्य द्वार के पास स्थित वजन कांटे पर मौजूद कर्मचारियों से जानकारी मांगी गई। वहां मौजूद कर्मचारियों और अंदर बैठे एक युवक ने स्पष्ट रूप से कहा कि बिना पूर्व अनुमति किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं दिया जा सकता। जब युवक से दोबारा अंदर जाने की अनुमति देने का आग्रह किया गया और उसके वरिष्ठ अधिकारी राव साहब से फोन पर बात कराई गई, तब भी बिना अनुमति प्रवेश नहीं देने की बात दोहराई गई।
इसके बाद स्थायी समिति के अध्यक्ष से भी फोन पर संपर्क किया गया। उन्होंने भी औपचारिक प्रक्रिया के तहत अनुमति लेने की बात कही। इस दौरान यह सवाल उठाया गया कि यदि डंपिंग साइट पर कचरे का प्रसंस्करण और अन्य कार्य नियमानुसार तथा पारदर्शी तरीके से हो रहे हैं, तो वहां की वास्तविक स्थिति देखने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
निरीक्षण करने पहुंचे लोगों ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल यह जानना था कि डंपिंग साइट पर कचरे का प्रसंस्करण किस तरह किया जा रहा है और सरकारी नियमों के अनुसार जमीनी स्तर पर काम हो रहा है या नहीं। काफी बातचीत के बाद आखिरकार अंदर जाने की अनुमति मिल गई।
दावा किया गया कि डंपिंग साइट के भीतर पहुंचने पर वहां की स्थिति देखकर कई सवाल खड़े हुए। अंदर चल रही प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई। हालांकि, सामने आए आरोपों और वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच आवश्यक है।
अब आणंद सेवासदन और महानगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से डंपिंग साइट के संचालन, कचरे के निस्तारण और प्रसंस्करण की व्यवस्था की जांच कराने की मांग उठ रही है। साथ ही यह भी सवाल किया जा रहा है कि आम जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े इतने महत्वपूर्ण कार्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

