9 अक्टूबर की कार्रवाई के बाद मलबे के बीच रहने को मजबूर होने का दावा; प्रभावित लोगों ने पुनर्वास और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की
अहमदाबाद के भूधरपुरा इलाके में 9 अक्टूबर को हुए ध्वस्तीकरण के बाद कुछ परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। प्रभावित लोगों का कहना है कि वे मलबे के बीच रहने को मजबूर हैं और वहां पीने के पानी, बिजली तथा सुरक्षित आश्रय की सुविधा नहीं है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल मदद और वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।
प्रभावित परिवारों के अनुसार, वे अपनी समस्या लेकर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और महापौर हितेश बारोट से मिले थे। उनका दावा है कि उन्हें मदद का आश्वासन दिया गया, लेकिन आगे की कार्रवाई के लिए उप आयुक्त से संपर्क करने को कहा गया। परिवारों का आरोप है कि वहां उनसे अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, जबकि ध्वस्तीकरण के दौरान उनके कई कागजात और घरेलू सामान मलबे में दब गए।
स्थानीय लोगों का यह भी दावा है कि संबंधित संपत्ति या मकानों के संबंध में अदालत का स्थगन आदेश मौजूद था। हालांकि, आदेश की प्रति और ध्वस्तीकरण से जुड़े प्रशासनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। नगर निगम और संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है।
प्रभावित परिवारों ने दिवाली से पहले रहने की व्यवस्था करने, दस्तावेजों के पुनर्निर्माण में मदद देने और ध्वस्तीकरण की वैधता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित जनप्रतिनिधियों से हस्तक्षेप की अपील की है।
मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई का विवरण सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

