मातर के राणासर में खेतों में छोड़ा जा रहा दूषित पानी, माही नहर में मिलकर पेयजल को दूषित करने की आशंका; प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी उठे सवाल
खेड़ा। जिले के मातर तालुका के राणासर क्षेत्र में कथित रासायनिक प्रदूषण का मामला सामने आने से किसानों और स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है। लिम्बासी-मालवाड़ा मार्ग पर स्थित कॉनकॉर्ड बायोटेक कंपनी पर आरोप है कि फैक्ट्री से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी आसपास के खेतों में छोड़ा जा रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस संबंध में कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें खेतों की ओर गंदा पानी बहता दिखाई दे रहा है।
किसानों के अनुसार, फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी खेतों में पहुंचने से धान की खड़ी फसल प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने पूरे साल मेहनत और खर्च करके फसल तैयार की थी, लेकिन रासायनिक पानी के कारण उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आसपास के अन्य खेतों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि स्थानीय निवासियों ने आशंका जताई है कि दूषित पानी आगे चलकर माही नहर में मिल सकता है। ऐसा होने पर नहर से जुड़े जलस्रोतों और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों और प्रदूषण के वास्तविक स्तर की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले में किसानों और ग्रामीणों ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पहले शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल मौके पर पहुंचकर पानी और मिट्टी के नमूने एकत्र करे तथा उनकी प्रयोगशाला में जांच कराई जाए।
किसानों ने कंपनी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई, प्रभावित फसलों का सर्वेक्षण और उचित मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई है।
अब पूरे मामले में प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कंपनी से निकलने वाला पानी कितना प्रदूषित है, उसे खेतों में छोड़ा जा रहा है या नहीं और इससे कृषि भूमि तथा जलस्रोतों को कितना नुकसान पहुंचा है। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर उनकी फसलों और पेयजल स्रोतों को संभावित प्रदूषण से बचाएगा।

