गाजियाबाद के वैशाली और इंदिरापुरम के लोगों के लिए अच्छी खबर है। जीडीए अब आवंटियो से किसानों के बढ़े हुए मुआवजे की रकम सीधे नहीं वसूलेगा। कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को मुआवजा देने के विकल्प तलाशने की बात कही है।
गाजियाबाद के वैशाली और इंदिरापुरम के आवंटियों को किसानों के बढ़े हुए मुआवजे की वसूली से राहत मिलेगी। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब लोगों से सीधे मुआवजे की रकम नहीं वसूलेगा। इसके लिए शासन की मदद से नई योजना तैयार की जाएगी।
फिलहाल जिन लोगों को वसूली के नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें कोई रकम जमा करने की जरूरत नहीं है। भुगतान नहीं करने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं होगी। कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा और जीडीए उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल के बीच शनिवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के बाद सुनील शर्मा ने बताया कि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को मुआवजा देने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। जीडीए और शासन मिलकर इसका रास्ता निकालेंगे। अंतिम निर्णय होने तक नोटिस पाने वाले लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
तुलसी निकेतन के 2,250 फ्लैटों के पुनर्विकास पर भी चर्चा
बैठक में तुलसी निकेतन के करीब 2,250 फ्लैटों के पुनर्विकास का मुद्दा भी उठा। जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि इस काम के लिए 18 टीमें लगी हुई हैं। दो-तिहाई लोगों की सहमति मिलने के बाद अगले महीने डीपीआर तैयार करने का काम शुरू किया जाएगा।
राजनगर एक्सटेंशन की आठ सड़कों की मरम्मत की तैयारी
राजनगर एक्सटेंशन की आठ सड़कों को दुरुस्त करने के साथ ही आउटर रिंग रोड का काम शुरू कराने की भी तैयारी है। इन आठ सड़कों का नामकरण भी किया जाएगा। बैठक में इन विकास कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
1983 में जमीन अधिग्रहण के बाद शुरू हुआ था विवाद
जीडीए ने वर्ष 1983 में किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर वैशाली के छह सेक्टर और इंदिरापुरम के ज्ञानखंड और न्यायखंड में आवासीय योजनाएं विकसित की थीं। मुआवजे को लेकर किसान अदालत चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके बाद जीडीए ने मुआवजे की भरपाई के लिए स्थानीय आवंटियों और संपत्ति मालिकों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए थे।
पांच लाख रुपये तक जमा करने के नोटिस मिले थे
जीडीए ने वैशाली में 2300 और इंदिरापुरम में 1350 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से वसूली प्रस्तावित की थी। कई लोगों को एक से पांच लाख रुपये तक जमा करने के नोटिस मिले थे। वैशाली वार्ड-76 के पार्षद गौरव सोलंकी के मुताबिक, किसानों को करीब 300 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना है।
जीडीए की बिना बिकी संपत्तियों से जुटाए जा सकते हैं संसाधन
कैबिनेट मंत्री ने बताया कि किसानों को मुआवजा देने के लिए जीडीए की उन संपत्तियों का इस्तेमाल करने का विकल्प भी है, जो अब तक नहीं बिकी हैं। वहीं, अन्य तरीके से भी संसाधन जुटाने पर विचार किया जा रहा है।

