आजादी के आंदोलन से लेकर जय जवान-जय किसान के नारे, जेपी आंदोलन और अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन तक, कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह रहा है यह ऐतिहासिक मैदान
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक रामलीला मैदान एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। यहां इंडिया गठबंधन की विशाल रैली आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है। रामलीला मैदान केवल एक सार्वजनिक स्थल नहीं, बल्कि देश के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण गवाह रहा है। आजादी से पहले के आंदोलनों से लेकर स्वतंत्र भारत के बड़े राजनीतिक संघर्षों तक, इस मैदान ने कई ऐतिहासिक घटनाओं को अपने भीतर समेटा है।
रामलीला मैदान का इतिहास कई दशक पुराना है। वर्ष 1930 के दशक में इस स्थान को विकसित कर खुले मैदान का रूप दिया गया, ताकि यहां पारंपरिक रामलीला का आयोजन किया जा सके। आजादी से पहले महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने भी यहां जनसभाओं को संबोधित किया था। इन सभाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विचारों और संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाया गया।
वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और देश में खाद्यान्न संकट के दौर में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इसी मैदान से ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया था। इस नारे ने सैनिकों और किसानों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने का संदेश दिया।
वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान रामलीला मैदान सत्ता के विरोध में उठी आवाजों का प्रमुख केंद्र बना। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने यहां बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए तत्कालीन सरकार के खिलाफ आंदोलन को धार दी थी। इसी दौरान कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ भी आंदोलन का प्रमुख संदेश बनी। आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में हुए चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और केंद्र में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
इसके बाद वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने भी इसी मैदान में व्यापक जनसमर्थन हासिल किया। जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में युवाओं और आम नागरिकों ने भाग लिया। इस आंदोलन ने देश की राजनीति पर गहरा प्रभाव डाला और आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन की पृष्ठभूमि तैयार हुई।
बाबा रामदेव के काले धन के मुद्दे पर किए गए आंदोलन के साथ-साथ किसानों और मजदूरों के विभिन्न प्रदर्शन भी इस मैदान से जुड़े रहे हैं। अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले संगठनों ने यहां कई बार सभाएं और प्रदर्शन किए हैं।
रामलीला मैदान का इतिहास बताता है कि यह स्थान समय-समय पर जनआंदोलनों, राजनीतिक विरोध और सार्वजनिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इंडिया गठबंधन की मौजूदा रैली के साथ एक बार फिर यह मैदान राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। ऐसे में देश की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यहां से उठने वाली राजनीतिक आवाज का आगे क्या असर पड़ता है।

