राजकोट हाईवे पर खुलेआम चल रहे खेल पर पुलिस की कार्रवाई: भारी मात्रा में 19,522 बोतलें ज़ब्त करने के बाद पार्षद के बेटे हितेश उर्फ वंगा समेत 10 शराब तस्कर फरार हो गए। पक्को गुजरात न्यूज़, जामनगर: गुजरात में शराब बैन को सख्ती से लागू करने के दावे कैसे कागज़ों पर सिर्फ़ दिखावा साबित हो रहे हैं, इसका एक और जीता-जागता और चौंकाने वाला उदाहरण जामनगर से सामने आया है। सत्ता के नशे में चूर, कानून तोड़कर शराब पीने वाले अब बेलगाम हो गए हैं, और इसकी पुष्टि तब हुई जब सत्ताधारी पार्टी BJP की एक महिला पार्षद के बेटे के गोदाम से लाखों रुपये की विदेशी शराब ज़ब्त की गई।
इस घटना ने पूरे राज्य की राजनीति और पुलिस फोर्स में बड़ा भूचाल ला दिया है। क्या है पूरी घटना? पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी और डिटेल्स के मुताबिक, जामनगर-राजकोट हाईवे पर मानसी होटल के पीछे के इलाके में एक गोदाम है। लोकल पुलिस को जानकारी मिली कि इस गोदाम में बड़ी मात्रा में विदेशी शराब की पेटियां काटी (अनलोड) जा रही हैं। जानकारी के आधार पर पुलिस ने तुरंत इस गोदाम पर छापा मारा। जब पुलिस ने अचानक छापा मारा तो वहां शराब की पेटियां उतारने का काम चल रहा था। पुलिस ने हैरानी की बात है कि मौके से कुल 19,522 बोतल विदेशी शराब जब्त की है, जिसकी मार्केट में कीमत 53.78 लाख रुपये आंकी गई है।
यह काला कारोबार किसका है? सत्ता की छत्रछाया में चल रहा एक नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में हुए खुलासों ने सबको चौंका दिया है। इस बड़े गोदाम और इस काले शराब के कारोबार का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि जामनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड नंबर 10 की BJP महिला कॉर्पोरेटर मंजूबेन बांभानिया का बेटा हितेश उर्फ वंगा है। सत्ताधारी पार्टी के एक पदाधिकारी के परिवार से इतने बड़े और करोड़ों के अवैध शराब के कारोबार के पकड़े जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा और विवाद हो गया है।
सवाल उठ रहे हैं कि क्या सत्ता की आड़ में इस तरह का बेलगाम अवैध शराब का धंधा चल रहा था? क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी या वे जानबूझकर आंखें मूंदे हुए थे?
10 आरोपी फरार, पुलिस की अलग-अलग टीमें काम पर लगीं
पुलिस की छापेमारी के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर और पुलिस को देखकर पार्षद के बेटे हितेश उर्फ वंगा समेत कुल 10 आरोपी मौके से भागने में कामयाब हो गए। पुलिस ने इस मात्रा में शराब के साथ गाड़ियों और अन्य सामान को जब्त कर लिया है और मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल, जामनगर पुलिस ने मुख्य मास्टरमाइंड हितेश उर्फ वंगो और उसके साथियों को गिरफ्तार करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है और उनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमें बनाई हैं।
जनता का गुस्सा और सवालों की झड़ी
इस घटना के बाद आम जनता और विपक्षी पार्टियों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। जनता का सीधा सवाल यह है कि जब गांधी-सरदार के गुजरात में इस तरह ट्रकों में भरकर खुलेआम विदेशी शराब की तस्करी हो रही है और इसमें सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के बच्चों के नाम भी सामने आ रहे हैं, तो आम नागरिक किस तरह की सुरक्षा की उम्मीद कर सकते हैं? क्या शराबबंदी के कागजों पर बने कानून सिर्फ आम लोगों के लिए हैं या फिर राजनीतिक रसूख वाले लोगों को बचाने के लिए भी हैं? अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी सख्ती बरतती है और फरार पार्षद के बेटे तक कानून की पकड़ कब पहुंचेगी।

