ग्वालियर स्थित दारुल कुरआन मदरसे को सील कर दिया गया है। रेस्क्यू की गई बच्चियों ने बताया है कि उन्हें यातना दी जाती थी। बच्चियों ने उन लोगों के नाम भी लिए हैं। बताया कि हमें मदरसे में यातना दी जाती थी। बच्चियों से पूछताछ बाल समिति के सदस्यों के सामने हुई है।
हाइलाइट्स
ग्वालियर के अवैध मदरसे में बच्चियों को यातना
बच्चियों से करवाई जाती थी टॉयलेट की सफाई
मदरसे के अंदर बच्चों को लटकाया जाता था उल्टा
टॉयलेट की भी करवाई जाती थी सफाई
मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की गई है। इसका संचालन बिना पंजीयन के हो रहा था। इसके बाद बाल संरक्षण आयोग की टीम ने वहां से रेस्क्यू की गईं, बच्चियों से पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान बच्चियों ने मदरसे के अंदर उनके साथ होने वाली क्रूरता को बयां की हैं।
500-500 उठक बैठक करवाई जाती
बाल संरक्षण आयोग की टीम ने बच्चियों और बच्चों से कई घंटे तक पूछताछ की है। इस दौरान चौंकाने वाली अहम जानकारी सामने आई है। बच्चियों ने बताया कि उनसे मदरसे में 500-500 बार उठक-बैठक करवाई जाती थी। इससे भी मन नहीं भरता था तो उन्हें उल्टा लटका दिया जाता था। बच्चियां ये सब कुछ बताते हुए कांप रही थीं।
इनके लिए नाम
बच्चियों ने पूछताछ में ऐसी प्रताड़ना के लिए दो लोगों के नाम लिए हैं। इमें इस्लाम की शिक्षा देने वाली नजमा बाजी और साबिर खान है। बच्चियों ने यह भी आरोप लगाया है कि हमसे टॉयलेट की सफाई भी करवाई जाती थी। इन्हें हमेशा चारदीवारी में कैद करके रखा जाता था।
मदरसे को सील करके की जा रही है जांच
प्रशासन ने इस अवैध मदरसे को सील कर दिया है। साथ ही आगे की जांच की जा रही है। बच्चियों के साथ हुई अमानवीयता को कागजों में दर्ज किया गया है। रेस्क्यू किए गए बच्चों में 18 बालक और आठ बच्चियां हैं। वहीं, मदरसे के रिकॉर्ड में 57 बच्चे रजिस्टर्ड हैं।
बाल समिति के सदस्यों के सामने लिए गए बयान
इन बच्चियों से बाल समिति के सदस्यों के सामने उनके बयान लिए गए हैं। सभी यूपी, राजस्थान और एमपी के रहने वाले हैं। मदरसे के अंदर सिर्फ इस्लामिक शिक्षा दी जाती थी। उन्हें स्कूली शिक्षा से पूरी तरह से दूर रखा जाता था। बच्चों की उम्र भी 16 साल से कम है।

