वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने चैलेंज किया है कि भारत में 10 फीसदी से ज्यादा ग्रोथ हासिल करने की क्षमता है। इसके साथ ही उन्होंने ऐसे आलोचकों को भी आड़े हाथ लिया है जो उनके अनुसार, हमेशा निगेटिव बातें करते हैं। ऐसे लोगों के बारे में वित्त मंत्री का कहना है कि उन्हें भारत के नाकाम होने में मजा आता है।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भरोसा जताया है कि भारत 10 फीसदी से ज्यादा की आर्थिक विकास दर हासिल कर सकता है। उन्होंने सभी सेक्टर में टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को ज्यादा अपनाने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही उन आलोचकों पर निशाना साधा जो हमेशा निगेटिव बात करते हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक, ऐसे लोगों को भारत के नाकाम होने पर मजा आता है।
सीतारमण IIT मद्रास एलुमनाई एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक विकास से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ बनने के सफर को रफ्तार मिलेगी। लेकिन, इसके लिए सभी तरफ से बहुत ज्याादा कोशिशों की जरूरत होगी।
10% से ज्यादा ग्रोथ हासिल करना मुमकिन
सीतारमण ने कहा, ’10 फीसदी से ज्यादा की विकास दर हासिल करना मुमकिन है। मैं यह सिर्फ आप लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए नहीं कह रही हूं। यह मुमकिन है।’
उन्होंने 2015 के बाद से स्टार्टअप्स की ग्रोथ का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले सालों में वे अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे सकते हैं।
आलोचकों पर तीखा हमला
सीतारमण ने नकारात्मक सोच को दूर करने और लोगों को सकारात्मक सोचने और जमीनी स्तर पर हो रहे विकास को पहचानने के लिए प्रेरित करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां बहुत से ऐसे लोग हैं जो हमेशा नकारात्मक बातें करते हैं। ऐसे बहुत से लोग हैं जिन्हें भारत के नाकाम होने पर मजा आता है। हम सच में ऐसा बर्दाश्त नहीं कर सकते। हमें इन लोगों को सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करना होगा।’
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किधर था सीतारमण का इशारा?
सीतारमण ने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन हाल में विपक्ष समेत कई दिग्गज अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाए। इनमें आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन और पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग शामिल थे। इन सभी ने पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ के 7.8 फीसदी रहने के बाद सवाल उठाए थे।
खेती में टेक्नोलॉजी का किया जिक्र
खेती में टेक्नोलॉजी की भूमिका पर बात करते हुए सीतारमण ने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से उत्पादकों को बाजार से जोड़ने और उत्पादकता बढ़ाने में ‘जबरदस्त फर्क’ आया है।
उन्होंने फसल की कटाई और अगली फसल के लिए जमीन तैयार करने में तेजी लाने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का जिक्र किया। साथ ही, जमीन के टुकड़ों की सटीक मैपिंग के लिए ड्रोन और एरियल जियोस्पेशियल इंस्ट्रूमेंट्स के इस्तेमाल की भी बात की। इनकी मैपिंग पहले हाथ से की जाती थी।
उन्होंने कहा, ‘इसलिए, टेक्नोलॉजी के तेजी से आगे बढ़ने के साथ स्टार्टअप्स में होने वाले इनोवेशन को हर सेक्टर में लाना होगा।’
सीतारमण ने खाद वितरण में पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनों के इस्तेमाल का उदाहरण दिया। यह चोरी या बर्बादी को रोकने के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का एक अच्छा उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि POS सिस्टम अभी भी पायलट टेस्टिंग के दौर में है। यह किसान, जमीन और उगाई जा रही फसल की जानकारी रिकॉर्ड करता है। साथ ही, यह मिट्टी, सिंचाई और फसल की स्थिति के आधार पर खाद की सही मात्रा के बारे में किसानों को जानकारी भी देता है।
मंत्री ने कहा कि किसानों के पास खाद खरीदने का विकल्प बना रहेगा, जबकि टेक्नोलॉजी उन्हें यह बताएगी कि उनकी फसल के लिए कितनी मात्रा काफी होगी।
सीतारमण ने कहा कि कीटनाशकों और खाद के ज्यादा इस्तेमाल से मिट्टी और पानी प्रदूषित हो रहे हैं। टेक्नोलॉजी इस समस्या को हल करने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा, ‘इसलिए ये टेक्नोलॉजी जितनी जल्दी इन सेक्टरों तक पहुंचेंगी, भारत के लिए उतना ही अच्छा होगा। आप चीजों का बेहतर तरीके से उत्पादन कर पाएंगे और इस तरह विकास में योगदान देंगे।’

