अहमदाबाद। 18 सितंबर को हुई भारी बारिश के बाद बने भयानक हालात ने पूरे शहर को बंधक बना लिया है। बारिश भले ही कुदरती हो, लेकिन वहीवटदार की बड़ी लापरवाही और नाकाबिलियत ने इसे पानी की आफ़त बना दिया है। गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया संयोजक और प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने बीजेपी नेताओं और स्थानीय वहीवटदार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि अहमदाबाद को त्योहारों की चमक-दमक नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा, ज़िम्मेदारी और पारदर्शिता चाहिए। राजनीतिक जश्न और चापलूसी के चक्कर में पिछली गलतियों से कोई सबक नहीं सीखा गया है।
पहले नर्मदा बांध से अचानक पानी छोड़ा गया था और भरूच और अंकलेश्वर के इलाके डूब गए थे, वही गलती आज अहमदाबाद में दोहराई गई है। साबरमती नदी को सिर्फ़ दो किनारों पर बहता दिखाने के लिए साबरमती नदी के सभी गेट बंद रखकर वासना बैराज का जल स्तर 136.50 फ़ीट तक बढ़ा दिया गया। आम हालात में और नगर निगम के नियमों के मुताबिक, जब भारी बारिश का अनुमान हो, तो नदी का स्तर 129 फीट से ऊपर नहीं जाना चाहिए। लेकिन, मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद, नदी को क्षमता से ऊपर रखा गया। अगर यह जमा पानी योजना के मुताबिक रात में धीरे-धीरे खाली कर दिया जाता, तो सुबह की बारिश का पानी शहर में बाढ़ लाने के बजाय आसानी से बह जाता। लेकिन अधिकारियों की नाकाबिलियत की वजह से सुबह एक साथ वासना बैराज के 14 गेट खोलकर 26,000 क्यूसेक पानी छोड़ना पड़ा। इस जल्दबाजी में लिए गए फैसले से निचले इलाकों, नीचे के गांवों और जमावड़े वाली जगहों को बहुत नुकसान हुआ है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि एक साथ 14 गेट खोलने से पहले निचले इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों को पहले से चेतावनी क्यों नहीं दी गई? क्या प्रशासन की यह ज़िम्मेदारी नहीं थी कि वह एसएमएस, सायरन या सार्वजनिक बयान के ज़रिए जनता को चेतावनी देता? 2016 की बाढ़ और वडोदरा में विश्वामित्री नदी की घटनाओं के बाद भी प्रशासन सबक सीखने को तैयार नहीं है। अहमदाबाद के लोगों की सुरक्षा के खिलाफ उठाए गए इन गंभीर मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरी घटना की समय पर और स्वतंत्र तकनीकी जांच की जाए। बैराज का हर घंटे का पानी का स्तर, पानी का बहाव, गेट खुलने का समय, पहले चेतावनी के सबूत और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जांच की जाए। मानक संचालन प्रक्रिया का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मानसूनी तैयारी के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के दावों के बीच, अहमदाबाद में पानी की बमबारी करने वाले प्रशासन की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

