एजुकेशन मिनिस्टर जीतूभाई वघानी के राज में एजुकेशन सिस्टम का करप्ट खेल! “इस स्कूल में एक ऐसा बच्चा पढ़ रहा है जो इस धरती पर कभी पैदा ही नहीं हुआ! ऐसे अनदेखे और भूतिया बच्चों को देखना हो तो जूनागढ़ जिले के मेंदरडा तालुका के सूरजगढ़ गांव में ‘भगवती आश्रमशाला’ में आइए!” गुजरात के एजुकेशन डिपार्टमेंट और ट्राइबल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की नाक के नीचे से करोड़ों रुपये के सरकारी ग्रांट की खुलेआम लूट का एक बड़ा स्कैम सामने आया है।
जूनागढ़ जिले के मेंदरडा तालुका के सासन क्लस्टर के तहत ‘श्री भगवती आदिजाति आश्रमशाला’ में एडमिनिस्ट्रेशन और एडमिनिस्ट्रेटर्स की मिलीभगत से गैर-मौजूद काल्पनिक बच्चों के नाम पर करोड़ों रुपये कमाने का काला धंधा फल-फूल रहा है। राज्य के शिक्षा मंत्री जीतूभाई वघानी गांधीनगर में बैठकर ‘क्वालिटी एजुकेशन’ के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन अपने ही डिपार्टमेंट में चल रही इस लूट पर चुप बैठे हैं! फर्जी डॉक्यूमेंट्स और रिकॉर्ड का खेल: करोड़ों की लूट कैसे होती है? इस संस्था में सरकारी ग्रांट पाने और ऑडिट में न पकड़े जाने का एक सिस्टमैटिक और करप्ट खेल बनाया गया है: बिना किसी ‘भूत’ बच्चे: स्कूल की किताबों और ऑनलाइन पोर्टल पर तो काफ़ी एडमिशन दिखाए जाते हैं, लेकिन असल में असली स्टूडेंट्स आधे भी नहीं हैं। ऐसे मनगढ़ंत बच्चे भी जो असल में हैं ही नहीं या जो कभी पैदा ही नहीं हुए, उन्हें सरकार को स्कूल रजिस्टर में एंट्री के तौर पर दिखाया जा रहा है।
फर्जी L.C., एज सर्टिफिकेट और अटेंडेंस: जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं या कभी स्कूल नहीं गए, उनके लिए नकली लिविंग सर्टिफिकेट (L.C.) और नकली बर्थ सर्टिफिकेट (एज सर्टिफिकेट) बनाए जाते हैं। बच्चों को रोज़ाना अटेंडेंस शीट में झूठे साइन और नकली एंट्री करके कागज़ पर मौजूद दिखाया जाता है, जबकि क्लासरूम में बच्चों की फिजिकल प्रेजेंस ज़ीरो होती है। पेपर SMC और एजेंडा बुक: ग्रांट खर्च को मंज़ूरी दिलाने के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की फ़र्ज़ी मीटिंग कागज़ पर दिखाई जाती हैं। बच्चों के हक के करोड़ों एडमिनिस्ट्रेटर की जेब में: एक तरफ़ तो स्कूल में बच्चे नहीं हैं, लेकिन बुक में काफ़ी संख्या दिखाकर हर स्टूडेंट को महीने का मेंटेनेंस ग्रांट (₹2,580/-), स्टेशनरी, यूनिफ़ॉर्म, साथ ही साबुन, तेल और तौलिए के नाम पर करोड़ों रुपये की सरकारी ग्रांट सीधे इंस्टीट्यूशन के अकाउंट में ट्रांसफ़र कर दी जाती है। सैकड़ों स्टूडेंट होने का दावा करने वाले स्कूल में सिर्फ़ 1 या 2 टीचर ही अपनी ड्यूटी करते दिखते हैं! शिक्षा मंत्री जीतूभाई वघानी पर उठते सवाल:
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ शिक्षा मंत्री जीतूभाई वघानी और बड़े अधिकारियों से सीधे जवाब चाहता है: मंत्री की चुप्पी या नासमझी?: आपकी छत्र-छाया में जूनागढ़ की भगवती आश्रमशाला में बच्चे कागज़ पर पढ़ रहे हैं और करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं, क्या आपको इसकी जानकारी नहीं है? या करोड़ों के इस स्कैम की आंच गांधीनगर तक पहुंच रही है? सरप्राइज चेक क्यों नहीं?: ट्राइबल डेवलपमेंट ऑफिसर और प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेटर इस आश्रम स्कूल का सरप्राइज चेक क्यों नहीं करते? ऐसे इंस्टीट्यूशन को ग्रांट किसके आशीर्वाद से दी जाती है, जिनका आधार वेरिफिकेशन में कोई रिजल्ट नहीं आता? “हमारे एजुकेशन डिपार्टमेंट का कमाल तो देखिए, सर; जहां बच्चा पैदा भी नहीं होता, वह किताबों से पढ़कर सीधे ग्रेजुएट बन जाता है!” जनता की मांग है कि इस गंभीर स्कैम के खिलाफ तुरंत एक हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई जाए, बोगस L.C. और फर्जी रिकॉर्ड बनाने वाले एडमिनिस्ट्रेटर, प्रिंसिपल और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त क्रिमिनल केस (FIR) दर्ज किया जाए, और हड़पी गई ग्रांट वापस ली जाए।

