राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील में प्रशासन द्वारा खाटू श्याम मंदिर तोड़े जाने पर भारी बवाल मच गया है। 15 गांवों के चंदे से बन रहे इस मंदिर पर जेसीबी चलने से ग्रामीण भड़क उठे हैं।
राजगढ़: जिले में आस्था और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच टकराव का बड़ा मामला सामने आया है। ब्यावरा तहसील के लखनवास क्षेत्र में बड़ली माता मंदिर पहाड़ी पर बन रहे खाटू श्याम मंदिर को प्रशासन ने जेसीबी चलाकर जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान 100 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद रहा, जिसने करीब 2 हजार वर्ग फीट में चल रहे निर्माण को पूरी तरह हटा दिया। घटना के बाद से ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
15 गांवों के चंदे से खड़ा हो रहा था आस्था का केंद्र
ग्रामीणों का दावा है कि यह मंदिर किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 15 गांवों के लोगों की आस्था का केंद्र था। सभी ने आपस में चंदा इकट्ठा कर खाटू श्याम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया था। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते या विरोध दर्ज कराते, तब तक प्रशासनिक बुलडोजर ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले न तो कोई नोटिस दिया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका दिया।
खाटू श्याम मंदिर में दर्शन का समय
खाटू श्याम जी मंदिर में भक्तों के लिए खाटू श्याम जी मंदिर के दर्शन का समय:
सर्दियों में (अक्टूबर से मार्च तक) – सुबह 5:30 से शाम 9:00 बजे तक, रात्रि में 6:30 से 9:00 बजे तक
गर्मियों में (अप्रैल से सितंबर तक) – सुबह 4:30 से शाम 10:00 बजे तक, रात्रि में 5:30 से 10:00 बजे तक।
क्रेशर मशीन और अवैध खनन को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहाड़ी पर क्रेशर मशीन स्थापित करने और अवैध खनन के लिए रास्ता साफ करने की नीयत से यह कार्रवाई की गई है। उनका कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध खनन और ब्लास्टिंग की शिकायतें की जा रही थीं, जिस पर प्रशासन आंखें मूंदकर बैठा रहा, लेकिन जब ग्रामीणों ने अपनी आस्था से मंदिर बनवाया तो तुरंत हथौड़ा चला दिया गया।
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राजगढ़ की ब्यावरा तहसील के लखनवास में बड़ली माता पहाड़ी पर हुई कार्रवाई।
100 पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में 2 हजार वर्ग फीट में चल रहा निर्माण हटाया गया।
15 गांवों के ग्रामीणों ने आपसी चंदे से खाटू श्याम मंदिर का निर्माण शुरू कराया था।
ग्रामीणों ने क्रेशर और अवैध खनन के लिए मंदिर गिराने का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रशासन का पक्ष: सरकारी जमीन पर था अतिक्रमण
दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले पर जानकारी देते हुए तहसीलदार रामनिवास धाकड़ ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी तरह से सरकारी जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है। उन्होंने बताया कि नियमों के तहत संबंधित पक्ष को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए ही निर्माण हटाया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

