राजनांदगांव छत्तीसगढ़ : पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय संगठन आईंरा इंटरनेशनल रिपोर्टर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री से मांग किया है कि छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार पर कठोर कानून बनाया जाए आज छत्तीसगढ़ के अमुमन सभी जिले से आए दिन सामाजिक बहिष्कार के किस्से कहानी और अखबारों से भरे हुए मिलते हैं लेकिन जब उसके अंदर तक जाओ तो बड़ा आश्चर्य लगता है कि मामूली बातों पर लोगों का सामाजिक बहिष्कार किया जा रहा हैं
एवं चंद दलाल प्रवृत्ति के लोग अपने व्यक्तिगत खुन्नस गरीब लोगों पर निकाल रहे हैं मसलन जैसे गांव में कोई सरपंच बना है उसका प्रचार कर दिया तब सामाजिक बहिष्कार गांव में किसी सामाजिक कार्यक्रम में कोई व्यक्ति अगर भाग नहीं लिए तब सामाजिक बहिष्कार किसी की लड़की अगर अंतर जाति विवाह कर लिया तो सामाजिक बहिष्कार कोई अगर गांव में त्यौहार मनाया जा रहा है और काम में चल गया तब सामाजिक बहिष्कार सामाजिक बहिष्कार की पहेली यह बहिष्कृत करने वाले व्यक्तियों से लंबी चौड़ी पैसे की डिमांड की जा रही है ना जाने कितने सालों से गांव में परंपरा चली आ रही है अब तक लाखों करोड़ों रुपए इकट्ठे हो चुके हैं इनका भी हिसाब शासन प्रशासन को देनी चाहिए लेनी चाहिए हाल ही में शहर से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डिलापहरी गांव से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है जिसमें 22 वर्मा परिवार को सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ा है उनकी गलती मात्र थी थी कि किसी को ₹100000 जुर्माना दंड स्वरूप लगाया गया है तो उसने 50000 जमा किया इसलिए सामाजिक बहिष्कार किसी की लड़की दूसरे जाति से विवाह कर लिया इसलिए सामाजिक बहिष्कार किसी ने 5 साल पहले अगर दूसरे जाति से शादी किया है तब सामाजिक बहिष्कार और लंबी चौड़ी पैसे की डिमांड पैसा देने के बावजूद भी सामाजिक बहिष्कार एक तरीके से हिटलर शाही तानाशाही सरकार से इतर समानांतर सरकार जैसा चल रहा है केंद्रीय कानून मंत्री से आग्रह है कि सामाजिक बहिष्कार पर कठोर कानून बनाया जाए एवं शीघ्र ही लोकसभा और विधानसभा में पारित किया जाए सामाजिक बहिष्कार करने वाले व्यक्तियों पर तीन लाख का जुर्माना वह 5 साल कठोर कारावास का प्रबंध किया जाना चाहिए क्योंकि सामाजिक बहिष्कृत व्यक्ति का मान सम्मान आबरू हया सारा कुछ लुट जाता है वह बर्बाद हो जाता है वह किसी को मुंह दिखाने खाने के काबिल नहीं होता वह भी आज के जमाने में 21वीं सदी में जहां लोकतंत्र है संविधान है कानून है उसके बावजूद भी ऐसे गांव गांव गांव अधकचरा रूढ़िवादी लोग कैसे एक दूसरे के ऊपर सामाजिक बहिष्कार का डर दिखाकर लंबे चौड़े पैसे डकारते हुए नजर आ रहे हैं

