बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह बेहद दुख की बात है कि जिन मासूम बच्चों के हंसने-खेलने और पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है.
बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जेन-अल्फा यानी साल 2013 के बाद जन्मे बच्चे-बच्चियों में और उनके माता-पिता में बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा को लेकर चिंता है, लेकिन यूपी और उत्तर भारत के राज्यों में स्कूलों की बदतर हालत की जमीनी हकीकत के कारण वे लोग अब मुखर हो गए हैं.
मायावती ने कहा कि वे लोग जेन-जी यानी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के देशव्यापी ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बेहद दुख और चिंता की बात है कि जिन मासूम बच्चे-बच्चियों के हंसने-खेलने और पढ़ने-लिखने के दिन हैं, उन्हें प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के लिए बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर भी सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर होना पड़ रहा है.
मायावती ने एक्स पर कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के ‘शिक्षित बनो’ के आह्वान के कारण शिक्षा, खासकर स्कूली शिक्षा, ‘बहुजन समाज’ के लोगों के लिए हमेशा विशेष चिंता का विषय रही है. इसी के तहत यूपी में बीएसपी ने दबे-कुचले और शोषित-पीड़ित समाज के लोगों के हित, कल्याण और शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया.
उन्होंने आगे कहा कि यह बड़े दुख और चिंता की बात है कि सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में ध्यान देने के बजाय सभी सरकारों ने इसकी काफी हद तक अनदेखी की है.
उन्होंने कहा कि इस पूरी शिक्षा व्यवस्था को इन वर्गों के आरक्षण की तरह ही निष्क्रिय बनाने का कुचक्र चलाया जा रहा है. इस प्रक्रिया में हजारों सरकारी स्कूल बंद भी किए जा रहे हैं, जिसका बीएसपी लगातार विरोध करती रही है. अब स्कूलों में भवन, शिक्षक, पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर जेन-अल्फा भी मुखर होने के साथ-साथ आंदोलन कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यूपी समेत अन्य राज्यों की सभी सरकारें जेन-अल्फा के मासूम बच्चे-बच्चियों की बेहतर शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी जरूरतों और मांगों पर पूरी सहानुभूति के साथ सही नीयत और नीति से तत्काल ध्यान दें. साथ ही, उनके खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग से पूरी तरह बचें.

