मैहर जिले के कठहा सरकारी स्कूल में क्लासरूम की स्मार्ट स्क्रीन पर एडल्ट फिल्म ‘धुरंधर’ दिखाने वाले अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह पटेल को जिला शिक्षा अधिकारी ने बर्खास्त कर दिया है। वीडियो वायरल होने और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई है।
सतना: मध्य प्रदेश के मैहर जिले से शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। अमरपाटन तहसील के कठहा गांव स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के क्लासरूम में छात्रों को डिजिटल एलईडी स्क्रीन पर एडल्ट फिल्म ‘धुरंधर’ दिखाने का मामला तूल पकड़ गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने और अभिभावकों द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अतिथि शिक्षक को सेवा से बर्खास्त कर दिया है।
क्या है पूरा मामला और कैसे खुला राज?
यह पूरी घटना 31 जुलाई की बताई जा रही है, जब स्कूल में पांचवें पीरियड के दौरान कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई के लिए लगाई गई स्मार्ट डिजिटल स्क्रीन पर पढ़ाई के बजाय फिल्म ‘धुरंधर’ चलाई जा रही थी। क्लासरूम के अंदर फिल्म चलने का यह वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय अभिभावकों में भारी गुस्सा देखा गया और उन्होंने तुरंत सीएम हेल्पलाइन पर इसकी शिकायत दर्ज करा दी।
मैहर के सरकारी स्कूल में क्लासरूम के भीतर चली एडल्ट फिल्म ‘धुरंधर’
वीडियो वायरल होने और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद ऐक्शन
DEO सलोनी शर्मा ने आरोपी अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह को किया बर्खास्त
शिक्षक ने सफाई दी थी कि बच्चों की जिद पर फिल्म चलाई गई थी
कलेक्टर के निर्देश पर जांच और बर्खास्तगी
मामले की गंभीरता को देखते हुए मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने तुरंत जांच के आदेश दिए। अमरपाटन के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कुंवर बहादुर सिंह ने जब इस मामले की जमीनी जांच की, तो लापरवाही पूरी तरह से सिद्ध हो गई। रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सलोनी शर्मा ने गुरुवार को हिंदी पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षक हंसराज सिंह पटेल की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए।
कटिहार जिलाधिकारी ने स्कूल पहुंचकर बच्चों की लगाई क्लास, बोर्ड पर लिखकर पढ़ाया
जिला शिक्षा अधिकारी सलोनी शर्मा ने शिक्षक के इस गैर-जिम्मेदाराना तर्क को पूरी तरह खारिज कर दिया। डीईओ ने दोटूक शब्दों में कहा कि क्लासरूम में शिक्षक की मौजूदगी के बाद भी इस तरह की प्रतिबंधित फिल्म का चलना पूरी तरह अक्षम्य है। इससे पूरे शिक्षा विभाग और स्कूल की छवि धूमिल हुई है।
सेंसर बोर्ड से मिला है ‘A’ सर्टिफिकेट
इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म ‘धुरंधर’ को ‘A’ (एडल्ट ओनली) यानी केवल वयस्कों के लिए प्रमाणित किया है। भारतीय कानून के नियमों के मुताबिक 18 साल से कम उम्र के किशोरों और स्कूली बच्चों को इस तरह की फिल्में दिखाना या उनका देखना कानूनन प्रतिबंधित है। शिक्षा के पवित्र मंदिर में नाबालिग बच्चों को इस तरह की फिल्म दिखाए जाने के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है।

