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अगस्त के पहले सप्ताह और जोरदार होगी बारिश, यूपी के लिए IMD ने दिया बड़ा अपडेट

यूपी में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक अगस्त के पहले सप्ताह से मानसून फिर सक्रिय होगा और यूपी के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है. 1 जून से 29 जुलाई तक सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि,पूर्वी यूपी में सबसे ज्यादा बारिश की कमी दर्ज की गई है.

उत्तर प्रदेश में मानसून की रफ्तार जुलाई के अंतिम दिनों में भले ही धीमी पड़ गई हो, लेकिन मौसम विभाग ने अगस्त की शुरुआत को लेकर राहत भरी खबर दी है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ सकता है. हालांकि, अब तक राज्य में सामान्य से 25 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून ने शुरुआत तो अच्छी की, लेकिन जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ गई. इसका असर पूरे प्रदेश के बारिश के आंकड़ों पर साफ दिखाई दे रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 29 जुलाई के बीच राज्य में सामान्य से 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है. इससे खेती-किसानी, विशेषकर धान की रोपाई और खरीफ फसलों की बुवाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, मौसम विभाग ने किसानों और आम लोगों को राहत देने वाला पूर्वानुमान जारी किया है. विभाग के मुताबिक, अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून दोबारा सक्रिय होगा और उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है.

यूपी में अब तक कितनी हुई बारिश

आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 29 जुलाई तक उत्तर प्रदेश में कुल 258.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 342.8 मिमी होनी चाहिए थी. यानी पूरे प्रदेश में अब तक 25 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है. यह कमी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर खेतों में भी दिखाई देने लगा है. जिन इलाकों में सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं हैं, वहां किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.

पूर्वी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर

बारिश की सबसे अधिक कमी पूर्वी उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई है. यहां 1 जून से 29 जुलाई के बीच 252.8 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य औसत 370.4 मिमी है. यानी इस क्षेत्र में 32 प्रतिशत बारिश कम हुई. पूर्वांचल के कई जिलों में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों की नमी कम हो गई है. इससे धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है.

इन जिलों में 50 फीसदी से ज्यादा बारिश की कमी

आईएमडी के मुताबिक, प्रदेश के कई जिलों में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं. भदोही, देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर में सामान्य से 50 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी दर्ज की गई है. लगातार शुष्क मौसम के कारण इन जिलों में किसानों को सिंचाई पर अधिक निर्भर रहना पड़ रहा है. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खेती की लागत बढ़ सकती है.

पश्चिमी यूपी की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की स्थिति पूर्वी हिस्से की तुलना में बेहतर रही है. यहां 267 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य औसत 304.2 मिमी है. यानी इस क्षेत्र में बारिश की कमी 12 प्रतिशत रही. हालांकि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी बारिश समान रूप से नहीं हुई. मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि गौतमबुद्ध नगर, पीलीभीत, शामली और अमरोहा में अब भी बारिश का बड़ा घाटा बना हुआ है.

जुलाई क्यों होता है किसानों के लिए सबसे अहम महीना

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण महीना होता है. इसी दौरान धान की रोपाई के साथ-साथ मक्का, दलहन और तिलहन की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है. अगर इस दौरान पर्याप्त बारिश नहीं होती तो खेतों में नमी की कमी हो जाती है, जिससे फसलों की शुरुआती बढ़वार प्रभावित होती है. बाद में सिंचाई का सहारा लेना पड़ता है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ जाता है.

क्या बोले कृषि विशेषज्ञ

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी रमेंद्र कुशवाहा का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश किसान मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं. उनके अनुसार, अगर बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो फसलों की बढ़वार प्रभावित होगी. साथ ही किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा, जिससे खेती की लागत बढ़ जाएगी.

अगस्त के पहले सप्ताह में क्यों बदलेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव (डीप डिप्रेशन) अब मध्य छत्तीसगढ़ और उससे सटे उत्तर आंतरिक ओडिशा के ऊपर पहुंच गया है. इस मौसम प्रणाली के कारण मानसून की मुख्य गतिविधियां फिलहाल मध्य भारत की ओर शिफ्ट हो गई हैं. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई के अंतिम दिनों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं. लेकिन जैसे ही यह सिस्टम कमजोर होगा, मानसून ट्रफ दोबारा उत्तर की ओर खिसकेगी. इसके बाद उत्तर प्रदेश में अगस्त के पहले सप्ताह से फिर से व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है.

जुलाई के आखिर तक कैसा रहेगा मौसम

आईएमडी के अनुसार, जुलाई के शेष दिनों में उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी. कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक वर्षा की उम्मीद फिलहाल नहीं है बारिश में कमी के बावजूद मौसम विभाग का कहना है कि इस सप्ताह के अंत तक तापमान में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी. इसकी वजह यह है कि मौजूदा मौसम प्रणाली से जुड़ी तेज सतही हवाएं दिन के तापमान को नियंत्रित रखेंगी. इसलिए उमस बनी रह सकती है, लेकिन भीषण गर्मी जैसी स्थिति बनने की संभावना कम है.

किसानों के लिए राहत की उम्मीद

बारिश की कमी ने भले ही किसानों की चिंता बढ़ा दी हो, लेकिन मौसम विभाग का ताजा पूर्वानुमान राहत देने वाला है. यदि अगस्त के पहले सप्ताह में अनुमान के मुताबिक अच्छी बारिश होती है तो धान समेत खरीफ फसलों को बड़ा फायदा मिल सकता है. खेतों में नमी लौटेगी, सिंचाई पर निर्भरता कम होगी और फसलों की बढ़वार को भी गति मिलेगी. फिलहाल प्रदेश की निगाहें अगस्त की शुरुआत पर टिकी हैं. अगर मानसून अपने अनुमान के मुताबिक सक्रिय होता है तो जुलाई में हुई बारिश की कमी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है. यही वजह है कि किसान, कृषि वैज्ञानिक और मौसम विभाग सभी की नजर अब अगस्त के पहले सप्ताह में बनने वाले मौसम के नए सिस्टम पर है.

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