उत्तरप्रदेश के औरैया जिले के अजीतमल क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. हाईवे किनारे मिले अज्ञात शव की पहचान परिजनों ने अपने भाई कमल सिंह के रूप में कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था. हालांकि, शांति पाठ वाले दिन कमल सिंह अचानक खुद जिंदा घर पहुंच गया.
औरैया के अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के सैदपुर अड्डा निवासी कमल सिंह रैदास के घर शांति पाठ चल रहा था, तभी वह खुद जिंदा वापस आ गया. दरअसल, 18 जुलाई को नेशनल हाईवे किनारे मिले एक अज्ञात शव की पहचान 20 जुलाई को दशरथ सिंह ने अपने छोटे भाई कमल के रूप में की थी, पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंपा और 21 जुलाई को अंतिम संस्कार हुआ. पत्नी सुनीता को जानकारी थी कि उसका पति जिंदा है, जिसके बाद उसने फोन पर संपर्क कर कमल को ग्वालियर से घर बुलाया. 25 जुलाई को पत्नी ने पुलिस को सूचना दी और अब पुलिस असली शव की पहचान में जुटी है.
पत्नी ने खोज निकाला सच, ग्वालियर में था पति
कमल सिंह करीब डेढ़ साल से घर से बाहर था. वह पहले पंजाब में नौकरी करने गया, फिर ट्रक पर हेल्पर रहा और बाद में ग्वालियर में प्लंबर का काम करने लगा. जब परिजनों ने उसकी मौत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया, तब पत्नी सुनीता ने उस नंबर पर कॉल किया जिससे कमल बात करता था. ग्वालियर में कमल से बात होते ही सुनीता ने उसे तुरंत घर आने को कहा.
जब कमल सिंह अपने गांव सैदपुर अड्डा पहुंचा, तो घर पर उसका शांति पाठ चल रहा था. उसे सामने खड़ा देखकर परिवार और गांव के लोगों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं. जो व्यक्ति मरा समझा जा रहा था, वह जिंदा सामने खड़ा था. घटना की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई.
पुलिस जांच में जुटी, आखिर किसका हुआ अंतिम संस्कार?
पुलिस क्षेत्राधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि 18 जुलाई को मिले शव की पहचान दशरथ ने अपने भाई के रूप में की थी. 25 जुलाई को पत्नी ने कमल के जिंदा होने की खबर दी. अब पुलिस इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि परिजनों ने जिस अज्ञात शव का अंतिम संस्कार किया था, वह आखिर किसका था.

