हमीदिया रोड को जलभराव से बचाने के लिए PWD की नाकामी के बाद मेट्रो ने खुद 1 किमी लंबी ड्रेनेज लाइन बिछाई। हालांकि, पात्रा नदी में इसका आउटलेट होने से भारी बारिश में बैकफ्लो और बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है।
हमीदिया रोड को डूबने से बचाने के लिए PWD मुकरा तो मेट्रो ने उठाई कुदाली
भोपाल: राजधानी के सबसे व्यस्त व्यापारिक इलाके हमीदिया रोड को मानसून के पानी से बचाने की जिम्मेदारी PWD की थी, लेकिन ऐन मौके पर PWD ने हाथ खींच लिए। इसके बाद मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने खुद कमान संभाली और रेलवे ट्रैक के बगल से पात्रा नदी तक करीब 1 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड ड्रेनेज लाइन बिछाकर 24 चैंबर तैयार कर दिए।
मेट्रो टनल के दूसरे चरण का काम शुरू होने से पहले इस ड्रेनेज का बनना बेहद जरूरी था। हालांकि, मेट्रो के इस प्रयास के बाद भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नाले का आउटलेट पात्रा नदी में खोला गया है, जहां तेज बारिश के दौरान नदी उफान पर आते ही पानी बैकफ्लो होकर वापस हमीदिया रोड की दुकानों और सड़कों पर आ सकता है।
जब भी तेज बारिश होती है, पात्रा नदी का रूप देखने लायक (खतरनाक) होता है। इसने आसपास के निचले इलाकों में कई बार भारी तबाही और जलभराव फैलाया है। जफर, स्थानीय निवासी, बाग उमराव दूल्हा
दो विधानसभाओं की राजनीति में फंसा ड्रेनेज का आउटलेट हमीदिया रोड का यह ड्रेनेज आउटलेट दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की राजनीतिक खिंचाव का शिकार बन गया है। मेट्रो अधिकारियों ने पिछले दो महीनों में रात-दिन काम करके नाला तो बिछा दिया, लेकिन पानी के बहाव का रुख (पूर्व से पश्चिम का अंतर) तकनीकी रूप से अब भी सिरदर्द बना हुआ है।
अतिक्रमण और बेतरतीब खुदाई से बढ़ा संकट हमीदिया रोड पर लगातार हो रहे अतिक्रमण और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की खुदाई की वजह से पानी की निकासी का प्राकृतिक रास्ता बंद हो चुका है। अगर भारी बारिश हुई तो मेट्रो का यह अस्थाई इंतजाम नाकाफी साबित हो सकता है।
मामले के प्रमुख बिंदु:
प्रोजेक्ट निर्माण: MPMRCL द्वारा रेलवे ट्रैक के पास 1 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन और 24 चैंबर बनाए गए।
विवाद की वजह: PWD द्वारा काम न करना और दो विधानसभाओं के बीच सीमा विवाद।
असली खतरा: पात्रा नदी (छोटा तालाब का आउटलेट) के उफान पर आने से बैकफ्लो का डर।

