गाजीपुर की सीजेएम कोर्ट ने 3 दिसंबर 1990 के चर्चित देवकली पंप कैनाल लूटकांड में पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
गाजीपुर: करीब 36 साल पुराने देवकली पंप कैनाल लूटकांड में पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। गाजीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नूतन द्विवेदी की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के बाद बृजेश सिंह को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। यह मामला 3 दिसंबर 1990 का है, जिसमें फायरिंग, मारपीट और लूटपाट के आरोप लगाए गए थे।
1990 में दर्ज हुआ था मामला
यह मामला गाजीपुर के सैदपुर थाना क्षेत्र स्थित देवकली पंप कैनाल निर्माण कार्य के दौरान हुई घटना से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान बृजेश सिंह अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों के साथ मारपीट, फायरिंग तथा लूटपाट की। इस संबंध में मुकदमा मुख्तार अंसारी पक्ष की ओर से दर्ज कराया गया था।
अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में किया दोषमुक्त
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) नूतन द्विवेदी की अदालत ने बृजेश सिंह के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए और उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
दो अन्य आरोपियों का मामला हाईकोर्ट में लंबित
इस मुकदमे में बृजेश सिंह के अलावा त्रिभुवन सिंह और विजय नारायण (विजय शंकर) सिंह भी नामजद थे। हालांकि, इन दोनों आरोपियों की पत्रावली पहले ही अलग कर दी गई थी। उनके मामलों को लेकर दायर निगरानी याचिका फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
वकील ने क्या कहा?
बृजेश सिंह के अधिवक्ता अशोक राय ने बताया कि इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया गया था। बृजेश सिंह के खिलाफ चल रही कार्यवाही एमपी-एमएलए कोर्ट के दायरे में थी। अदालत ने सभी उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद उन्हें दोषमुक्त कर दिया। वहीं, अन्य दो आरोपियों से संबंधित प्रकरण अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

