मेरठ में दलित छात्रा की हत्या में राजनीति तेज होती जा रही है। शुक्रवार को मेरठ जा रहे चंद्रशेखर आजाद के काफिले की कुछ गाड़ियों को पुलिस ने रोक ली। इसके बाद चंद्रशेखर और पुलिस के बीच नोकझोंक हुई।
हाइलाइट्स
रोहाना टोल प्लाजा पर पुलिस ने समर्थकों की गाड़ियां रोकी थीं
दलित छात्रा की हत्या के बाद मेरठ जा रहे थे चंद्रशेखर
चंद्रशेखर आजाद और पुलिस के बीच हुई तीखी नोकझोंक
मुजफ्फरनगर: नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद का काफिला शुक्रवार को मुजफ्फरनगर के रोहाना टोल प्लाजा पर उस समय विवादों में घिर गया, जब पुलिस ने उनके साथ चल रहे कुछ वाहनों को रोक दिया। बताया गया कि सांसद की गाड़ी टोल पार कर गई थी, लेकिन पीछे आ रही कुछ गाड़ियों को पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद सांसद स्वयं वाहन से उतरकर पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे और इस दौरान उनकी पुलिसकर्मियों से तीखी नोकझोंक हुई।
घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, बातचीत के दौरान एक इंस्पेक्टर हाथ जोड़कर सांसद को स्थिति समझाने का प्रयास करता दिखाई दिया। वहीं, सांसद पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से जवाब मांगते रहे। बहस के दौरान एक इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह, चंद्रशेखर आजाद के सामने हाथ जोड़े खड़े नजर आए और चंद्रशेखर आजाद उसे ज्ञान का पाठ पढ़ाते दिखाई पड़े। इस दौरान इंस्पेक्टर ये कहता हुआ भी सुनाई पड़ा कि मैं इंस्पेक्टर हूं और इंस्पेक्टर ही रहूंगा, गाली नहीं दी थी।
‘एसएसपी से करेंगे मुलाकात’
रोहाना टोल पर हुए घटनाक्रम के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिला मेरठ के लिए रवाना हो गया। उनका कहना है कि वह मेरठ में हाल ही में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। साथ ही उन लोगों और उनके परिजनों से भी मिलेंगे, जो इस प्रकरण से प्रभावित बताए जा रहे हैं।
‘लोकतांत्रिक तरीके से बात रखने जा रहे हैं’
सांसद ने कहा कि वह किसी टकराव के उद्देश्य से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रहे हैं। उनके अनुसार, देश जानता है कि मेरठ में क्या हुआ। लोकतांत्रिक व्यवस्था में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का आचरण मर्यादित होना चाहिए। यदि जनता के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो लोगों के मन में भय और अविश्वास पैदा होना स्वाभाविक है।
‘आवाज उठाना जनप्रतिनिधि का काम’
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है, तो उसके खिलाफ आवाज उठाना जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है। वह संबंधित अधिकारियों से मिलकर यह जानना चाहते हैं कि ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी और इसके पीछे क्या कारण रहे?
‘इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए’
रोहाना टोल पर काफिले को रोके जाने के सवाल पर सांसद ने कहा कि इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी को रोका गया है, तो उसके पीछे स्पष्ट कारण बताया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल इतना है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो और जो दोषी हो, उसके विरुद्ध निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए।
‘लोगों का पुलिस पर भरोसा कम हुआ है’
मेरठ की घटना का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि यदि पुलिस जांच पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है, तो प्रशासन को पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों की भाषा और व्यवहार ने लोगों की चिंता बढ़ाई है, जिसकी निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए।
‘आत्महत्या समाधान नहीं’
आत्महत्या की कोशिश करने वाले अधिवक्ता के सवाल पर सांसद ने कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने लोगों से संघर्ष और कानूनी रास्ता अपनाने की अपील करते हुए कहा कि अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से लड़ाई लड़नी चाहिए।
‘कानूनी रास्ता अपनाएंगे’
सांसद ने स्पष्ट किया कि वह मेरठ में प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेंगे, पीड़ित पक्ष की बात सुनेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आगे की लोकतांत्रिक रणनीति तय करेंगे। उन्होंने दोहराया कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि कोई निर्दोष जेल न जाए और कोई दोषी बचने न पाएं।

