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खेड़ा पुलिस का दोहरा खेल: एक तरफ जन-जागरूकता का ढोंग, दूसरी तरफ भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण में ठगी का काला कारोबार!

विशेष विस्फोटक रिपोर्ट, खेड़ा : “जहाँ लोभी होते हैं, वहाँ ठग कभी भूखे नहीं मरते”— यह कहावत तीर्थधाम और पवित्र भूमि माने जाने वाले खेड़ा जिले में अक्षरों में सच साबित हो रही है। लेकिन इस खेल में सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि ठगों को बढ़ावा देने वाला कोई और नहीं, बल्कि खुद कानून के रखवाले हैं। चकलासी पुलिस स्टेशन की सीमा में आने वाले कुख्यात ‘चलाली वगड़ा’ में सालों से चल रहे ठगी के धंधे के खिलाफ आखिरकार खेड़ा जिला पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन जनता का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस तंत्र की नाक के नीचे यह पूरा सिंडिकेट फल-फूल रहा था, उन भ्रष्ट अधिकारियों पर गाज कब गिरेगी?

60-40 से लेकर फिक्स कमीशन: भ्रष्ट ‘खाकी’ मालामाल!

विश्वसनीय सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, जिला पुलिस के शातिर बिचौलियों (वहीवटदार) और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों की सीधी हिस्सेदारी में ठगी का यह काला साम्राज्य फल-फूल रहा है।

काली कमाई का बंटवारा: इस गंदे खेल में पहले 60-40 की पार्टनरशिप चलती थी, यानी ठग का हिस्सा 60% और भ्रष्ट पुलिस का 40%। अब सूत्रों के मुताबिक एक नया नियम लागू हुआ है— हर 1 लाख की लूट पर 25 हजार रुपये सीधे पुलिस की जेब में!

सेटलमेंट का अड्डा बने थाने: जब भी कोई पीड़ित नागरिक थाने आकर हंगामा करता है, तो पुलिस कानूनी मामला दर्ज करने के बजाय ‘सेटलमेंट’ (समझौता) कराने में जुट जाती है। पीड़ित को थोड़ी-बहुत रकम वापस दिलाकर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है, ताकि ऑन-रिकॉर्ड क्राइम रेट कम दिखे और
भ्रष्टाचार की तिजोरी भरती रहे।

‘करप्शन ब्रांच’ के असली आका कौन? CID क्राइम की जांच से खुलेंगे कई राज!

खेड़ा जिला पुलिस सोशल मीडिया पर ज्ञान बांट रही है कि “घटना होने के बाद घबराएं नहीं, तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।” लेकिन सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि जब खुद पुलिस ही ठगों के साथ मिली हुई हो, तो पीड़ित शिकायत दर्ज कराने किसके पास जाए?

स्थानीय गलियारों में हो रही चर्चाओं के अनुसार, खेड़ा क्राइम ब्रांच को ‘करप्शन ब्रांच’ बनाने में कथित रूप से लिप्त पुलिस इंस्पेक्टर के.आर. वेकरिया, एम.जे. बारोट, डिफॉल्टर जयेश रबारी और चकलासी के शातिर बिचौलिए कुलदीप सिंह के संरक्षण में अब तक कई बड़ी “पार्टियां” काटी (लूटी) जा चुकी हैं। हाल ही में एक थाना क्षेत्र के तहत एक व्यक्ति को 5 लाख रुपये में ठगे जाने की खबर है, जहाँ पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय बीच-बचाव कर ठग और अपनी, दोनों की इज्जत बचा ली!

मुख्य सवाल— जिनका जवाब खेड़ा पुलिस को देना ही होगा:

  1. अब तक चलाली वगड़ा के ठगों के खिलाफ कितनी वास्तविक FIR दर्ज की गईं?
  2. पीआई वेकरिया या कुलदीप सिंह जैसे कथित भ्रष्टों के पाप छिपाने के लिए अपराधों को रिकॉर्ड पर क्यों नहीं लिया जाता? क्या यह सीधे तौर पर ठगों को बढ़ावा देना नहीं है?
  3. सोने और डॉलर आधी कीमत पर देने का लालच देकर लोगों को कंगाल करने वाले ठग खुलेआम क्यों घूम रहे हैं?

राज्य के DGP से मांग: तत्काल तबादला कर बैठाई जाए उच्च स्तरीय जांच!

अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। खेड़ा एलसीबी के दोनों विवादित पुलिस इंस्पेक्टर के.आर. वेकरिया, एम.जे. बारोट और डिफॉल्टर जयेश रबारी के खिलाफ सीआईडी (CID) क्राइम द्वारा एक गहरी और निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग जनता के बीच बुलंद हो रही है। इस भ्रष्ट नेक्सस को तोड़ने के लिए इन सभी अधिकारियों का जनहित में तुरंत तबादला किया जाना बेहद जरूरी है, तभी खेड़ा जिले की जनता को न्याय मिलेगा और खाकी पर से उठ चुका भरोसा दोबारा कायम हो सकेगा।

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