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बारिश के लिए करना होगा और इंतजार, 1 जुलाई के बाद दिल्ली- NCR समेत उत्तर भारत पहुंचेगा दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, IMD अपडेट

दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में मॉनसून के सामान्य तौर पर आने की तारीख 27 जून है, लेकिन इस बार इसके उस तारीख तक आने की संभावना कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संभावना जताई है कि अब 1 जुलाई के बाद ही मॉनसून आ सकता है।

पुणे: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हालिया अनुमान के मुताबिक, 1 जुलाई के बाद बारिश में तेजी आने की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून, जो पिछले कुछ दिनों से धीमा चल रहा था, अगले महीने की शुरुआत से फिर से ज़ोर पकड़ सकता है। अनुमान के अनुसार, पहले हफ़्ते (25 जून – 1 जुलाई) में देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है, सिवाय दक्षिण प्रायद्वीपीय और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों के, जहां बारिश सामान्य या सामान्य से ज्यादा होने की उम्मीद है। हालांकि, अनुमान के दूसरे हफ़्ते (2-8 जुलाई) में पूरे देश में बारिश सामान्य या सामान्य से ज्यादा होने की संभावना है।

यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब देश में बारिश की कमी बनी हुई है। 24 जून को खत्म हुए हफ्ते में भारत में सामान्य से 47% कम बारिश हुई, जबकि 1 जून से अब तक कुल मॉनसून बारिश सामान्य से 42% कम रही है। मध्य भारत में मौसमी बारिश की कमी सबसे ज्यादा, यानी 59% दर्ज की गई।

मॉनसून नहीं बढ़ रहा आगे

IMD की वैज्ञानिक सुषमा नायर ने इस बदलाव के बारे में बताया और कहा कि मॉनसून का बहाव मज़बूत होने से पहले कुछ दिनों तक कमजोर रहने की संभावना है। उन्होंने कहा कि 26 जून से 28-29 जून के बीच मॉनसून का बहाव कमजोर है और मॉनसून की गति को बढ़ाने के लिए कोई खास अनुकूल स्थिति नहीं है। इसके बाद, बहाव के मज़बूत होने की उम्मीद है और उसी के अनुसार बारिश की गतिविधि भी बढ़ने की संभावना है।

महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाके से दूर बारिश

सुषमानायर ने कहा कि अगर हालात अनुकूल रहे, तो बारिश की वापसी महाराष्ट्र के तट से शुरू होकर अंदरूनी इलाकों तक फैल सकती है। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाकों में भी बारिश होगी।

मानसून के अनुकूल बन रहा मौसम

IMD ने यह भी कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के बाकी हिस्सों, और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं।

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