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राजनीतिक खरीद-फरोख्त और करोड़ों की सौदेबाजी, शिवसेना UBT फूट की खबरों के बीच फिर जमकर बरसे संजय राउत

पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में चुप रहने के बाद अब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के राज्यसभा सांसद और मुख्य प्रवक्ता संजय राउत लगातार बरस रहे हैं। उन्होंने पार्टी छोड़कर जाने वालों पर तीखा हमला किया। उन्होंने मुख्य रूप से धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर की आलोचना की।

मुंबई : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पार्टी के कुछ सांसदों की कथित बगावत को लेकर भाजपा और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा निशाना साधा है। अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोखठोक’ में राउत ने आरोप लगाया कि पार्टी छोड़ने की चर्चा में रहे सांसदों का कदम किसी वैचारिक मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ और सत्ता के दबाव का नतीजा है।

‘सामना’ में प्रकाशित लेख में राउत ने दावा किया कि सांसदों को पार्टी से अलग करने के लिए बड़े स्तर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त और करोड़ों की सौदेबाजी की गई। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों और क्षेत्रीय हितों के नाम पर दल-बदल को उचित ठहराने की कोशिश की जा रही है, जबकि इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है।

मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग से तुलना

संजय राउत के अनुसार, शिवसेना के टिकट, कार्यकर्ताओं की मेहनत और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मिले जनसमर्थन के आधार पर निर्वाचित हुए जनप्रतिनिधियों का पार्टी छोड़ना मतदाताओं के जनादेश के साथ विश्वासघात है। संजय राउत ने अपने लेख में दल-बदल की राजनीति की तुलना इतिहास के चर्चित विश्वासघातियों मीर जाफर, ब्रूटस, ज्युडास और क्विसलिंग से की। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में दल-बदल और राजनीतिक निष्ठा बदलने की घटनाओं को “बगावत” या “क्रांति” के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक नैतिकता के विरुद्ध है। उनका कहना था कि विचारधारा और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता को छोड़कर सत्ता के समीकरणों के आधार पर निर्णय लेना लोकतंत्र को कमजोर करता है।

संजय राउत ने आरोप लगाया कि देश में आयाराम-गयाराम की राजनीति को बढ़ावा मिला है, जिससे राजनीतिक नैतिकता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सत्ता हासिल करने या बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों को तोड़ने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

‘जनता नहीं भूलेगी विश्वासघात’

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस और पार्टी संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के जन्मशताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए राउत ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की आलोचना की। उन्होंने कहा कि शिवसेना केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि विचार और संघर्ष की परंपरा है। राउत ने विश्वास जताया कि जनता ऐसे राजनीतिक व्यवहार का उचित समय पर जवाब देगी और जनादेश के साथ हुए कथित विश्वासघात को भूलेगी नहीं।

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