१०० से अधिक डंपर और हिताची मशीनों से प्राकृतिक संपदा की खुली लूट, गांधीनगर तक ‘हफ्ताखोरी’ सेट होने की चर्चा से मचा हड़कंप!
विशेष खोजी रिपोर्ट (महानगर मेट्रो) कर्जन/वडोदरा : गुजरात में कानून का राज है या फिर राजनेताओं और खनन माफियाओं की सांठगांठ का? यह गंभीर सवाल इस समय वडोदरा जिले के कर्जन तालुका से उठ रहा है। कर्जन के विननगरवाड़ा गांव में, सासरोड मार्ग से नारेश्वर की ओर जाने वाले नर्मदा नदी के तट (पात्र) में प्राकृतिक संपदा की बेखौफ लूट मची हुई है।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कर्जन के भाजपा विधायक अक्षय पटेल की सीधी भागीदारी में गोकुल भरवाड़ नाम का शख्स यहां बड़े पैमाने पर अवैध रेत और मिट्टी के खनन का महाघोटाला चला रहा है।
मशीनरियों का विशाल काफिला और करोड़ों की रॉयल्टी चोरी
नर्मदा नदी के सीने को बिना किसी डर के छलनी किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, खनन स्थल पर 100 से 125 डंपर, 20 से 25 जेसीबी मशीनें, और 15 से अधिक हिताची व लोडर मशीनें दिन-रात काम पर लगाई गई हैं। लीज (पट्टे) की आड़ में सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, सरकार को केवल नाममात्र की रॉयल्टी चुकाई जा रही है और हर महीने करोड़ों रुपये की सरकारी रॉयल्टी की चोरी को अंजाम दिया जा रहा है।
गांधीनगर से लेकर मामलतदार तक सब ‘सेट’?
इस खनन माफिया राज के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ (शून्य) रहा।
फ्लाइंग स्क्वॉड मौन: गांधीनगर फ्लाइंग स्क्वॉड के ‘चावड़ा’ नामक अधिकारी को इस अवैध खनन की सटीक और पुख्ता जानकारी दिए जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह बड़ा सवाल है।
अधिकारी लाचार: स्थानीय प्रांत अधिकारी या मामलतदार की इतनी हिम्मत भी नहीं हो रही कि वे स्थल पर जाकर जांच कर सकें।
हफ्ताखोरी की चर्चा: जनचर्चा है कि विधायक अक्षय पटेल की सीधी पहुंच सीएम (CM) कार्यालय तक है। इसी रसूख के दम पर वडोदरा खान-खनिज विभाग से लेकर गांधीनगर के शीर्ष स्तर तक हर महीने लाखों रुपये का हफ्ता पहुंचाकर ‘सब कुछ सेट’ कर दिया गया है।
रिमिनल बैकग्राउंड वाले माफिया पर किसका वरदहस्त?
जिस गोकुल भरवाड़ के नाम पर यह पूरा नेटवर्क फल-फूल रहा है, उसका आपराधिक इतिहास रहा है। अतीत में अवैध रिवॉल्वर (हथियार) रखने के जुर्म में उसकी गिरफ्तारी हो चुकी है। ऐसे शातिर अपराधी आज विधायक के दम पर सरकारी संपत्ति को सरेआम लूट रहे हैं, जो राज्य की कानून-व्यवस्था के लिए एक खुली चुनौती है।
जनता का सवाल: क्या सरकार की नाक के नीचे चल रहा है यह खेल?
यह सनसनीखेज खुलासा सरकार और प्रशासनिक तंत्र पर सीधे सवाल खड़े करता है। क्या कर्जन के विधायक के आगे कानून बौना साबित हो चुका है? अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर स्थानीय निवासियों ने वडोदरा जिला कलेक्टर और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) के समक्ष सबूतों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर ली है।
अब देखना यह होगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करने वाली सरकार इस करोड़ों के रेत घोटाले पर कानून का बुलडोजर चलाती है, या फिर नेताजी के दबाव में आकर जीवनदायिनी नर्मदा नदी को यूं ही माफियाओं के हवाले छोड़ दिया जाएगा?
विशेष जांच ब्यूरो (Investigation Desk), महानगर मेट्रो।

