तेज आंधी-तूफान में तिरंगे झंडों के क्षतिग्रस्त होने के बाद दिल्ली सरकार ने अधिक मजबूत और टिकाऊ कपड़े के उपयोग की योजना बनाई है। टेक्सटाइल विशेषज्ञ झंडे के लिए उपयुक्त फाइबर, धागे, सिलाई और GSM पर वैज्ञानिक अध्ययन करेंगे ताकि राष्ट्रीय ध्वज लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
आंधी में तिरंगे को फटने से बचाने के लिए सरकार झंडे के फैब्रिक की वैज्ञानिक स्टडी कराएगी।
नई दिल्ली: कुछ दिन पहले 100 किमी/घंटे से भी अधिक रफ्तार से आए तूफान में कई जगहों पर लगे तिरंगे झंडे फट गए थे। राष्ट्रीय ध्वज को फटने से रोकने के लिए सरकार ने अब झंडे के फैब्रिक की स्टडी कराने का प्लान बनाया है। दिल्ली के कुछ टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के इंजीनियरों को सरकार ने ऐसे कपड़े से झंडा बनाने का सुझाव मांगा है, जो आंधी तूफान में भी क्षतिग्रस्त न हों।
ध्वज बनाने में ऐसे कपड़े का इस्तेमाल हो जो आंधी-तूफान में भी न फटे: प्रवेश
दिल्ली के पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, यह फैसला किया गया कि राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण में ऐसे कपड़े का इस्तेमाल किया जाए, जो आंधी-तूफान में भी न फटे।
इसके अलावा बार-बार धुलाई करने पर भी धागों या सिलाई पर कोई असर न हो। इसके लिए दिल्ली के कुछ टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के इंजीनियरों को कपड़ों के फाइबर (रेशों) से लेकर धागा और तैयार कपड़ा बनाने की पूरी प्रक्रिया से संबंधित मिकैनिकल, केमिकल और डिजाइन की वैज्ञानिक स्टडी करने के लिए कहा गया है।
आंधी में तिरंगे को फटने से बचाने के लिए सरकार झंडे के फैब्रिक की वैज्ञानिक स्टडी कराएगी।
कुछ दिन पहले 100 किमी/घंटे से अधिक की रफ्तार वाले तूफान में कई जगहों पर तिरंगे फट गए थे।
दिल्ली के PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, झंडे के लिए ऐसा कपड़ा चाहिए जो आंधी-तूफान में न फटे।
इसमें कपड़े का जीएसएम (ग्राम प्रति वर्ग मीटर) तय करने के लिए कहा गया है, ताकि उसी हिसाब से तय किया जा सके कि राष्ट्रीय ध्वज के लिए कितने जीएसएम का कपड़ा हो। इसके अलावा धागे से लेकर स्टिचिंग तक सबके बारे में पूरी जानकारी मांगी गई है।

