प्रकाश और सुनील ने समाजहित का नया इतिहास बनाया है।
श्री प्रकाशचन्द्र जैन (सांवेर वाले) श्री सुनील जैन एव मनीष जैन के व्यक्तित्व पर विशेष
नागदा – (राजेश सकलेचा) : किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसके भवनों, संसाधनों अथवा आर्थिक उपलब्धियों में नहीं, बल्कि उन व्यक्तित्वों में निहित होती है जो अपने जीवन का समय, अनुभव, परिश्रम और संसाधन समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर देते हैं। ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए केवल पदाधिकारी नहीं होते, बल्कि वे संगठन, विश्वास, संस्कार और प्रेरणा के जीवंत स्तंभ बन जाते हैं।
अगर एक नजर मे देखा जाय तो विगत अनेक वर्षों से श्री प्रकाशचन्द्र जैन स्थानकवासी श्रावक संघ के अध्यक्ष के रूप में तथा श्री सुनील जैन दिगम्बर जैन समाज संघ के अध्यक्ष के रूप में समाज की विभिन्न गतिविधियों का सफल नेतृत्व कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में अनेक धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और जनकल्याणकारी कार्यों को नई गति और नई पहचान मिली है। उन्होंने समाज को केवल संगठित ही नहीं किया, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलने की प्रेरणादायी परंपरा भी स्थापित की है।
इन समाजसेवियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने कभी पद को प्रतिष्ठा का साधन नहीं बनाया, बल्कि समाज सेवा का माध्यम माना। समाज के किसी भी आयोजन, कार्यक्रम अथवा आवश्यकता के समय वे सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं। चाहे धार्मिक आयोजन हो, सामाजिक उत्थान की योजना हो, युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास हो या समाज में सौहार्द और एकता का वातावरण निर्मित करना हो—हर क्षेत्र में उनका योगदान अनुकरणीय रहा है।
समाज को एक सूत्र में बांधकर रखना किसी भी नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। विभिन्न विचारों, अपेक्षाओं और परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करना सरल नहीं होता, किंतु श्री प्रकाशचन्द्र जैन एवं श्री सुनील जैन ने अपनी व्यवहार कुशलता, सरलता और मिलनसार व्यक्तित्व के बल पर यह कार्य अत्यंत सफलतापूर्वक किया है। उन्होंने सदैव संवाद, सहयोग और समन्वय की भावना को प्रोत्साहित किया, जिसके परिणामस्वरूप समाज में एकता और आत्मीयता का वातावरण मजबूत हुआ है।
*समाजहित के अनेक कार्यों में विभिन्न सामाजिक संगठनों और पदाधिकारियों का भी समय-समय पर सहयोग प्राप्त होता रहा है। इसी क्रम में मूर्तिपूजक संघ अध्यक्ष श्री मनीष जैन सहित समाज के अनेक जिम्मेदार कार्यकर्ताओं ने भी विभिन्न अवसरों पर सहयोग और समन्वय की भूमिका निभाई है, जिससे समाज के सामूहिक प्रयास और अधिक प्रभावी बन सके हैं। श्री मनीषजैन अपने सौम्य व्यवहार, सहज उपलब्धता एवं समाजहित की सकारात्मक सोच के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं। समाज के अनेक आयोजनों, सेवा कार्यों तथा जनहितकारी कार्यक्रमों में उनका सहयोग सदैव प्रेरणादायी रहा है।
श्री प्रकाशचन्द्र जैन एवं श्री सुनील जैन का जीवन इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सच्ची सेवा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि निरंतर कर्म और समर्पण से सिद्ध होती है। उन्होंने तन से सेवा, मन से समर्पण और धन से सहयोग देकर समाज सेवा की ऐसी प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत की है जो सभी के लिए अनुकरणीय है। समाज के हित में जब भी किसी कार्य की आवश्यकता हुई, तब उन्होंने बिना किसी अपेक्षा के अपना महत्वपूर्ण योगदान प्रदान किया।
सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ जैन समाज के सभी पूज्य साधु-साध्वी भगवंतों की सेवा, आहार एवं विहार व्यवस्था में भी सदैव अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। धर्मसंघ के प्रति उनकी श्रद्धा, विनम्रता और समर्पण भावना उनके व्यक्तित्व की विशिष्ट पहचान है। जब भी किसी संत-महात्मा का नगर आगमन होता है, तब वे पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ व्यवस्थाओं, सेवा कार्यों तथा धर्म प्रभावना के कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। संतों की सेवा को वे अपना परम सौभाग्य मानते हुए पूरे समर्पण के साथ अपना योगदान देते हैं।
उनके नेतृत्व में समाज में धार्मिक चेतना के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी बढ़ी है। उन्होंने युवाओं को समाज और धर्म से जोड़ने, नई पीढ़ी में संस्कारों का संचार करने तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। यही कारण है कि समाज का युवा वर्ग भी उन्हें आदर्श और मार्गदर्शक के रूप में देखता है।
ऐसे व्यक्तित्व किसी भी समाज के लिए ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होते हैं। उनका समर्पण, सेवा और नेतृत्व आने वाले समय में भी समाज को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। जैन समाज को गर्व है कि उसे ऐसे कर्मयोगी, दूरदर्शी और समाजनिष्ठ नेतृत्वकर्ता प्राप्त हुए हैं, जिन्होंने अपने कार्यों से सेवा और समर्पण का एक उज्ज्वल इतिहास रचा है।
अंत में यही कहा जा सकता है—
“समाज का उत्थान भाषणों से नहीं, बल्कि समर्पित व्यक्तित्वों के सतत प्रयासों से होता है।”
श्री प्रकाशचन्द्र जैन (सांवेर वाले) एवं श्री सुनील जैन ऐसे ही यशस्वी व्यक्तित्व हैं, जिनकी सेवाएँ समाज के इतिहास में सदैव स्वर्णिम अक्षरों में अंकित रहेंगी। उनका जीवन प्रेरणा है, उनका समर्पण समाज की शक्ति है और उनका नेतृत्व समाज की अमूल्य धरोहर है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि तीनों समाजरत्नों को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, यश और निरंतर समाजसेवा की शक्ति प्रदान करें, ताकि उनके अनुभव, मार्गदर्शन और सेवा का लाभ समाज को निरंतर मिलता रहे तथा समाज प्रगति और संगठन के नए आयाम स्थापित करता रहे। जानकारी नागदा से जीवनलाल जैन

