नई दिल्ली और गुवाहाटी में राजनीतिक हलचल तेज, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद पूर्वोत्तर और बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत
नई दिल्ली/गुवाहाटी:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बेहद करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव के राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने की खबरों ने देश के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मचा दी है। उनके इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से ही राजनीतिक हलकों में उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें बेहद तेज हो गई हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुष्मिता देव ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की है। इस मुलाकात की तस्वीरें और खबरें सामने आने के बाद से ही असम और बंगाल की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि वह जल्द ही आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकती हैं।
टीएमसी के लिए बड़ा सियासी नुकसान
सुष्मिता देव पूर्व में कांग्रेस की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल रही हैं और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कांग्रेस छोड़ने के बाद वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई थीं, जहाँ पार्टी नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा भेजने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर असम और त्रिपुरा में पार्टी के विस्तार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में उनका इस्तीफा देना टीएमसी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और खासकर पूर्वोत्तर में एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर और बंगाल की राजनीति पर पड़ेगा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि सुष्मिता देव भाजपा में शामिल होती हैं, तो इसका सीधा असर पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिम बंगाल की जमीनी राजनीति पर पड़ेगा। वह बराक घाटी की एक बेहद प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दल इस पूरे घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर अंदरूनी कलह और बढ़ते असंतोष से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि, सुष्मिता देव की ओर से भाजपा में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या लिखित बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी तरफ, भाजपा और टीएमसी दोनों ही दलों के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी इस संवेदनशील विषय पर अभी तक कोई स्पष्ट या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और सभी को औपचारिक बयान का इंतजार है।
राजनीतिक जानकारों का स्पष्ट कहना है कि आने वाले दिनों में सुष्मिता देव के अगले कदम से पूर्वोत्तर और बंगाल की राजनीति में नए सियासी समीकरण देखने को मिल सकते हैं, जो आगामी चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
- महानगर मेट्रो न्यूज़ के लिए विशेष रिपोर्ट।

