अहमदाबाद:
गुजरात में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला ऐसा है जिसमें एक ही पिता के दो बेटों की जाति अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। एक पुत्र अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC/SEBC) श्रेणी का है, जबकि दूसरा अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी का लाभ लेकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुका है।
मिली जानकारी के अनुसार रेवाभाई सरसैया के पुत्र हरेश रेवाभाई सरसैया ने वर्ष 2015-16 की भर्ती प्रक्रिया में SEBC (OBC) श्रेणी के अंतर्गत चयन प्राप्त किया था और वर्तमान में मोरबी में महेसूली तलाटी के पद पर कार्यरत हैं।
वहीं, उनके दूसरे पुत्र नवघण रेवाभाई सरसैया का चयन वर्ष 2023-24 में अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) में अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी के तहत जूनियर क्लर्क के पद पर हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक ही परिवार और एक ही पिता के दो पुत्र अलग-अलग आरक्षण श्रेणियों में कैसे शामिल हो सकते हैं? यदि दोनों के जाति प्रमाणपत्र वैध हैं, तो इसकी कानूनी और प्रशासनिक स्थिति क्या है? और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जाति प्रमाणपत्रों में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षण व्यवस्था का लाभ वास्तविक पात्र व्यक्तियों तक पहुंचे, इसके लिए जाति प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सख्त बनाए जाने की आवश्यकता है।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों भाइयों की अलग-अलग जाति श्रेणियों का आधार क्या है तथा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।

