हेमंत वर्मा संवाददाता राजनांदगांव : हाल ही में डोगरगांव ब्लॉक के 75 ग्राम पंचायत के सरपंचों ने एक साथ कलेक्टर को ज्ञापन दिया है कि निर्माण कार्यों के लिए फुटी कौड़ी नहीं सरपंचों ने ज्ञापन दिया है कि उनकी मांगे अगर 15 दिन में पूरी नहीं हुई तो सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र के सरपंचों के पास इतने काम है कि वह काम नहीं कर पा रहे हैं यह कैसा भेदभाव यह कैसा अन्याय है
यह कैसा भेदभाव है?
एक ओर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष माननीय डॉ. रमन सिंह जी अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कई ब्लॉकों के सरपंच विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिलने से परेशान होकर सामूहिक इस्तीफे तक देने को मजबूर हैं।
कांकेर के बाद अब डोंगरगांव ब्लॉक के सरपंचों का आक्रोश भी सामने आ रहा है। जब गांवों के विकास के लिए चुने गए जनप्रतिनिधियों को ही विकास कार्यों हेतु राशि नहीं मिलेगी, तो ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कैसे होगा?
डॉ. साहब, आप इस प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं। आपसे अपेक्षा है कि केवल एक विधानसभा नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के सरपंचों और ग्रामीण जनता की चिंता करें। विकास का अधिकार हर गांव का है, किसी एक क्षेत्र का नहीं।
छत्तीसगढ़ के सभी ग्राम पंचायतों के साथ समान व्यवहार हो, विकास कार्यों के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई जाए और सरपंचों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

