उत्तरप्रदेश के आगरा के बेलनगंज बाजार में बारिश के बीच एक जर्जर दो मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. इमारत गिरते ही बाजार में अफरा-तफरी मच गई. गनीमत रही कि हादसे के वक्त आसपास कोई राहगीर मौजूद नहीं था और लोग मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए. इमारत के गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
यूपी के आगरा में लगातार हो रही बारिश के बीच एक जर्जर दो मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसा थाना छत्ता क्षेत्र के बेलनगंज बाजार में हुआ. इमारत के गिरते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई. गनीमत रही कि जिस वक्त इमारत धराशायी हुई, उस समय उसके आसपास कोई राहगीर मौजूद नहीं था. ऐसे में बड़ा हादसा होने से टल गया.
इमारत के गिरने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि बारिश के बीच अचानक दो मंजिला इमारत का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिरता है. देखते ही देखते सब मलबे में बदल जाता है. इमारत गिरने के साथ ही आसपास धूल और मलबे का गुबार उठता दिखाई देता है.
बेलनगंज बाजार आमतौर पर लोगों की आवाजाही से व्यस्त रहता है. ऐसे में बीच बाजार में दो मंजिला इमारत के अचानक गिरने से वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया. इमारत के गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके की तरफ दौड़ पड़े.
हादसे के दौरान कुछ लोग मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी. बारिश के दौरान इसके गिरने की आशंका और बढ़ गई थी. फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में किसी राहगीर के घायल होने की खबर नहीं है.
आगरा में बारिश के मौसम में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है. पुराने शहर के कई इलाकों में दशकों पुरानी इमारतें मौजूद हैं. इनमें से कुछ इमारतें समय के साथ कमजोर हो चुकी हैं.
लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान पानी का असर ऐसी इमारतों की दीवारों और नींव पर पड़ सकता है. ऐसे में अगर समय रहते जर्जर भवनों को चिह्नित कर उनकी मरम्मत या उन्हें खाली कराने की कार्रवाई न हो, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
इमारत गिरने का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में बारिश के बीच इमारत को अचानक ढहते देखा जा सकता है. वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी जर्जर इमारतों को लेकर चिंता बढ़ गई है. लोगों का सवाल है कि बाजार और आबादी वाले इलाकों में मौजूद ऐसी इमारतों की समय रहते पहचान और सुरक्षा जांच क्यों नहीं की जाती?

