गाजियाबाद के लाखों प्रॉपर्टी टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए नगर निगम ने कूड़ा पृथक्करण से जुड़ी अपनी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब लोगों को क्यूआर कोड को स्कैन नहीं करना होगा।
गाजियाबाद: शहर के लाखों संपत्ति करदाताओं को राहत देते हुए नगर निगम ने कूड़ा पृथक्करण से जुड़ी अपनी व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग देने वाले लोगों को 10 प्रतिशत संपत्ति कर छूट का लाभ लेने के लिए रोजाना कूड़ा गाड़ी पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन नहीं करना होगा। लोगों की आपत्तियों और लगातार मिल रहे सुझावों के बाद निगम ने इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए स्कैनिंग की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।
नगर निगम ने कुछ समय पहले स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह नियम लागू किया था कि जो करदाता घर से गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग देंगे, उन्हें संपत्ति कर में 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी। इसके लिए कूड़ा संग्रहण वाहन पर लगे क्यूआर कोड को मोबाइल ऐप के माध्यम से स्कैन करना जरूरी था।
लोगों ने क्यूआर कोड का किया था विरोध
हालांकि यह व्यवस्था शुरू होते ही लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। नागरिकों का कहना था कि हर दिन क्यूआर कोड स्कैन करना व्यवहारिक नहीं है। कई लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, जबकि बुजुर्गों और तकनीक से कम परिचित लोगों को भी इसमें परेशानी हो रही थी। ऐसे में कर छूट जैसी सुविधा को तकनीकी प्रक्रिया से जोड़ना उचित नहीं माना गया।
क्यूआर कोड स्कैन की अनिवार्यता खत्म
इन आपत्तियों को देखते हुए नगर निगम ने व्यवस्था की समीक्षा की और अब क्यूआर कोड स्कैन करने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। निगम का कहना है कि गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग देने वाले करदाताओं को पहले की तरह 10 प्रतिशत टैक्स छूट का लाभ मिलता रहेगा। इस फैसले से शहर के पांच लाख से अधिक संपत्ति करदाताओं को सीधा फायदा होगा। इसके साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि प्रक्रिया आसान होने से अधिक लोग कूड़ा पृथक्करण अभियान से जुड़ेंगे और शहर की स्वच्छता व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

