- सुरपगला ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय निर्माण में बरती जा रही गंभीर अनियमितताएं
- पीएम आवास योजना तक में प्रतिबंधित सीमेंट की ईंटों से बनाई जा रही स्कूल की दीवारें
- प्रिंसिपल ने जताई चिंता, ठेकेदार का दावा– “इंजीनियर और अधिकारियों की हरी झंडी के बाद ही शुरू हुआ काम”
आबूरोड (विशेष प्रतिनिधि, महानगर मेट्रो) : आबूरोड की सुरपगला ग्राम पंचायत के अंतर्गत छापरी चौकी स्थित प्राथमिक विद्यालय के नए भवन निर्माण में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बच्चों के भविष्य और सुरक्षा को ताक पर रखकर निर्माणाधीन स्कूल भवन में बेहद घटिया और हल्की सामग्री का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है।
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दो महीनों से इस प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण के मानकों (Standards) को पूरी तरह किनारे कर दिया गया है।
सीमेंट ईंटों का उपयोग और घटिया गुणवत्ता
नियमों के अनुसार जिस सीमेंट की ईंट को प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत बनने वाले साधारण मकानों तक में स्वीकृति नहीं दी गई है, उसी घटिया सीमेंट ईंट का उपयोग मासूम बच्चों के इस सरकारी स्कूल की दीवारों को खड़ा करने में किया जा रहा है। इसके अलावा, दीवार और पिलर निर्माण में मानक के अनुसार न तो गुणवत्तापूर्ण सीमेंट का प्रयोग हो रहा है और न ही तय मापदंड का सरिया लगाया जा रहा है।
बड़ा सवाल: यदि कल को इस कमजोर इमारत के कारण कोई अप्रिय घटना या दुर्घटना घटित होती है, तो मासूम बच्चों की जान का जिम्मेदार कौन होगा? क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है?
रिंसिपल ने उठाई आपत्ति, ठेकेदार ने अफसरों पर डाला मढ़ाया दोष
छापरी चौकी स्थित स्कूल के वर्तमान प्रिंसिपल ने बातचीत के दौरान बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में इतनी निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग होते नहीं देखा। जब उन्होंने इस संबंध में ठेकेदार से विरोध दर्ज कराया, तो ठेकेदार ने साफ शब्दों में कहा कि “निर्माण सामग्री और
डिजाइन को संबंधित विभागीय इंजीनियर ने पास किया है, हम उसी के अनुसार काम कर रहे हैं।”
‘महानगर मेट्रो’ के रिपोर्टर लक्ष्मण ठाकोर द्वारा ठेकेदार से टेलीफोनिक बातचीत करने पर ठेकेदार ने दावा किया कि उच्च अधिकारियों ने खुद मौके का निरीक्षण किया था और निर्माण को मंजूरी दी थी।
ऊपर से नीचे तक मिलीभगत या महज लापरवाही?
यदि ठेकेदार का दावा सच है, तो यह स्पष्ट इशारा करता है कि निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक की मिलीभगत से भ्रष्टाचार का बड़ा खेल खेला जा रहा है। निरीक्षण के बावजूद अधिकारियों द्वारा घटिया निर्माण को ‘हरी झंडी’ देना उनकी कार्यशैली और मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों की मांग: जांच कर ध्वस्त किया जाए अवैध निर्माण
गांव के लोगों में इस धांधली को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- उच्च अधिकारियों की एक निष्पक्ष टीम तुरंत मौके पर भेजकर प्राथमिक जांच (Quality Audit) करवाए।
- निर्माण सामग्री, सीमेंट और सरिये की गुणवत्ता की लैब जांच की जाए।
- मानक के विपरीत हुए घटिया निर्माण को तुरंत ध्वस्त कर ठेकेदार और दोषी इंजीनियर/अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

