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जीतू पटवारी ने ग्वालियर कोर्ट में किया सरेंडर, जमानत भी मिली, 2024 लोकसभा चुनाव से जुड़ा है मामला

2024 लोकसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी पर विवादित बयान देने के मामले में एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें 25 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी।

जीतू पटवारी ने ग्वालियर कोर्ट में किया सरेंडर

ग्वालियर: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को ग्वालियर की विशेष MP/MLA कोर्ट में पहुंचकर चुपचाप सरेंडर कर दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान के मामले में कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

सरेंडर के बाद अदालत ने सुनवाई करते हुए पटवारी को 25 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 अगस्त को होगी, जहां उनके खिलाफ आरोप तय किए जा सकते हैं।

क्या है पूरा मामला और क्यों जारी हुआ था वारंट?

यह पूरा विवाद मई 2024 का है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि पटवारी ने सार्वजनिक मंच से बीएसपी प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भारतीय जनता पार्टी के साथ साठगांठ करने का आरोप लगाया था। इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी।

मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने जीतू पटवारी को 16 जनवरी 2026 को पेश होने का समन भेजा था। हालांकि, तय तारीख पर उनके न पहुंचने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।

पुलिस कप्तान को मिले थे सख्त निर्देश

वारंट जारी करने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने भिंड एसपी को साफ निर्देश दिए थे कि 27 जुलाई तक हर हाल में जीतू पटवारी की कोर्ट में मौजूदगी सुनिश्चित की जाए। पुलिस के बढ़ते दबाव और विधिक अड़चनों से बचने के लिए जीतू पटवारी अपने वकीलों की टीम के साथ चुपचाप ग्वालियर पहुंचे और सरेंडर की अर्जी दाखिल की।

केस से जुड़े मुख्य तथ्य:

घटना की तारीख: 4 मई 2024 (भिंड के उमरी थाने में FIR दर्ज)
विवाद की वजह: बीएसपी प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप
कोर्ट का एक्शन: 16 जनवरी 2026 को पेश न होने पर जारी हुआ था वारंट
राहत: 25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत
अगली सुनवाई: 3 अगस्त 2026 (आरोप तय होने की संभावना)

ग्वालियर-चंबल की सियासत पर असर

ग्वालियर-चंबल बेल्ट में चुनाव के दौरान नेताओं के बीच जुबानी तीर चलना आम बात है, लेकिन चुनावी भाषणों के बाद कानूनी शिकंजा कसने का यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर पूरे प्रदेश के सियासी जानकारों की नजरें टिकी रहेंगी।

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