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मध्य प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य, नहीं कराया तो 3 महीने की जेल, यूसीसी ड्राफ्ट में कड़े प्रावधान

मध्य प्रदेश के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कड़े प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, ऐसा न करने पर 3 महीने की जेल हो सकती है। साथ ही उत्तराधिकार नियमों में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार के यूनिफॉर्म सिविल कोड के ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बेहद कड़े नियम प्रस्तावित किए गए हैं। नए मसौदे के मुताबिक, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए संबंधित जिले के रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन में रहता है, तो उसे अधिकतम तीन महीने तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

माता-पिता को दी जाएगी जानकारी

इस प्रस्तावित कानून के तहत पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लिव-इन में रहने वाले युवाओं के माता-पिता को उनके रिलेशनशिप स्टेटस की औपचारिक सूचना दी जाएगी। इसके अलावा, स्थानीय पुलिस थानों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी पंजीकृत लिव-इन जोड़ों का पूरा रिकॉर्ड मेनटेन करना होगा। खास बात यह है कि मकान मालिक या पड़ोसी भी बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे लिव-इन रिलेशनशिप की शिकायत कर सकेंगे।

संपत्ति और उत्तराधिकार के नियमों में बड़ा बदलाव

यूसीसी के इस ड्राफ्ट में केवल लिव-इन ही नहीं, बल्कि उत्तराधिकार कानूनों में भी महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए गए हैं। अब तक किसी पुरुष की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पर पत्नी, बच्चों और मां का हक होता था। लेकिन नए कोड के तहत अब पिता को भी बेटे की संपत्ति में बराबर का वारिस माना जाएगा और कानूनी तौर पर उनका हिस्सा तय होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप शुरू करने पर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण और रिश्ता खत्म होने पर उसे औपचारिक रूप से कैंसिल कराना अनिवार्य होगा।
यदि कोई पुरुष अपनी लिव-इन पार्टनर (महिला) को छोड़ता है, तो वह महिला को गुजारा भत्ता देने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होगा।
उत्तराधिकार कानून में ‘मां’ शब्द की जगह अब ‘माता-पिता’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे मां के न रहने पर पिता का हक बना रहे।
यदि किसी किराए के मकान या इलाके में बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन कपल रह रहा है, तो मकान मालिक या पड़ोसी इसकी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।
यूसीसी के इस अंतिम ड्राफ्ट पर चर्चा के लिए 19 जुलाई को ऐतिहासिक जगदीशपुर किले में एक विशेष कैबिनेट बैठक बुलाई गई है।
ड्राफ्ट कमेटी द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस बिल को 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
आजादी के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) बिल पास करने वाला मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य बनने की राह पर है।
अब तक केवल उत्तराखंड में ही यूसीसी को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है और इसे लागू किया गया है, जबकि गुजरात और असम में यह अभी लंबित है।

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