जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी का कहना है कि कानून का राज ही मॉब लिंचिंग का समाधान है।
सहारनपुर : मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अफसर नियाज खान के एक बयान पर जमीयत उलेमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी भड़क गए हैं। लेखक नियाज खान ने कहा था कि देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं से बचने के लिए मुस्लिमों को अपना पहनावा तुर्की के मुसलमानों जैसा कर लेना चाहिए ताकि उनकी पहचान आसानी से ना हो सके।
इस पर मदनी का कहना है कि समस्या किसी समुदाय की पहचान या पहनावे से नहीं बल्कि नफरत की मानसिकता और कानून हाथ में लेने वाली भीड़ है। अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ितों से अपनी पहचान बदलने की अपेक्षा करना समस्या का समाधान नहीं हो सकता। कानून का राज ही मॉब लिंचिंग का समाधान है।
मौलाना मदनी ने जारी किया बयान
मदनी ने एक बयान जारी कर कहा कि किसी जिम्मेदार व्यक्ति की तरफ से पीड़ित समुदाय को अपनी पहचान छिपाने की सलाह देना न तो न्यायसंगत है और न ही लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप। दादरी, अलवर, हापुड़ और चरखी दादरी जैसी मॉब लिंचिंग घटनाओं में पीड़ितों का पहनावा हमलों का कारण नहीं था।
ज्यादातर मामलों में लोग टोपी पहने हुए थे: नियाज खान
आपको बता दें कि लेखक नियाज खान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मॉब लिंचिंग से जुड़े मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए थे। उनका कहना है कि भारत में मॉब लिंचिंग के ज्यादातर मामलों में लोग कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी पहने हुए थे। इस पहनावे से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसलिए मुस्लिमों को अपना ड्रेस और हुलिया बदल लेना चाहिए।
‘जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है’
एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है।

