गुना के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी सरकार मंदिर ट्रस्ट में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के बाद एक और प्रमुख ट्रस्टी के इस्तीफे और एसडीएम कोर्ट में चल रहे केस ने ट्रस्ट की वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चंबल-मालवा के आस्था केंद्र टेकरी सरकार ट्रस्ट में उथल-पुथल
गुना: मालवा-चंबल अंचल के लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केंद्र ऐतिहासिक श्री हनुमान टेकरी सरकार मंदिर ट्रस्ट इन दिनों गंभीर प्रशासनिक और आंतरिक संकट के भंवर में फंसा हुआ है। पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया द्वारा संरक्षक के पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद, अब एक और प्रमुख ट्रस्टी राजेंद्र अग्रवाल (पुत्र स्व. रामबाबू अग्रवाल) ने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इस लगातार होते इस्तीफों के दौर ने ट्रस्ट की आंतरिक गुटबाजी और व्यवस्थापकीय खामियों को सरेआम उजागर कर दिया है।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में गहराया है जब गुना टेकरी ट्रस्ट की वैधानिकता को लेकर लोक न्यास पंजीयन अधिकारी (एसडीएम कोर्ट) के समक्ष एक बेहद गंभीर कानूनी मामला विचाराधीन है।
12 ट्रस्टियों की मौत के बाद भी छिपाई गई जानकारी
शिकायतकर्ताओं ने वर्ष 1982 में गठित इस मंदिर ट्रस्ट के बायलॉज का हवाला देते हुए बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। नियमों के मुताबिक, ट्रस्ट के मूल 20 स्थाई सदस्यों में से ही हर साल पदाधिकारियों का चयन अनिवार्य है। शिकायत में खुलासा हुआ है कि इन 20 मूल ट्रस्टियों में से 12 सदस्यों की मृत्यु कई वर्ष पहले ही हो चुकी है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर इन रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां तो कर ली गईं, लेकिन इसकी कोई वैधानिक सूचना लोक न्यास पंजीयन अधिकारी को नहीं दी गई।
विहिप-बजरंग दल का तीखा विरोध
प्रशासनिक गड़बड़ियों के अलावा, ट्रस्ट हाल ही में प्राचीन शिवालय से दशकों पुरानी शिव परिवार की प्रतिमाओं को विस्थापित करने के अपने फैसले को लेकर भी चौतरफा घिरा था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के उग्र विरोध तथा जनआक्रोश के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष नारायण लाल अग्रवाल और सचिव ओ.पी. बरौनिया को बैकफुट पर आना पड़ा था। हालांकि, ट्रस्ट ने विरोध करने वालों को गैर-सनातनी बताते हुए कोर्ट जाने की धमकी दी थी, लेकिन इस जमीनी गतिरोध ने ट्रस्ट के भीतर की रार को और बढ़ा दिया, जिसका नतीजा अब लगातार हो रहे इस्तीफों के रूप में सामने आ रहा है।

