अयोध्या के राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मामले में गिरफ्तार अविनाश शुक्ला पहले पानी बेचकर गुजारा करता था। राम मंदिर में दान की गणना में नौकरी मिलने के बाद उसके दिन बदल गए। उसके पास से 20 लाख रुपये से अधिक रकम मिली है।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे, ऐसे-ऐसे खुलासे हो रहे हैं जो हैरत में डाल रहे हैं। चढ़ावा चोरी के आरोपी अविनाश शुक्ला के बारे में पता चला है कि वह पहले पानी बेचता था। बाद में उसे श्रीराम मंदिर जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के गणना केंद्र में नौकरी मिल गई थी। अब जब एसआईटी ने उसके घर पर जांच की तो 20.39 लाख रुपये और 1,121 अमेरिकी डॉलर मिले। कभी पानी बेचकर गुजारा करने वाले ने मंदिर में नौकरी करके कुछ ही समय में लाखों रुपये कैसे कमा लिए? एसआईटी अब इसकी जांच कर रही है।
अविनाश का चंपत राय से कनेक्शन
आरोपी अविनाश शुक्ला के अयोध्या में स्थित ठिकाने की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। शहर के कौशलपुरी में स्थित श्याम साधनालय योग केंद्र की योगाचार्य सीमा तिवारी ने बताया कि अविनाश का भाई अभिषेक दस साल से इस योग केंद्र से जुड़ा हुआ है। करीब डेढ़ साल पहले वह अविनाश को लेकर आया था। अभिषेक राम मंदिर से जुड़े लोगों के भी संपर्क में रहा है। योग केंद्र के लोग भी पहले से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से जुड़े रहे हैं। अभिषेक शुक्ला का भी वहां जाता था। संभव है कि इसी संपर्क के जरिए अविनाश को राम मंदिर में दान राशि गणना केंद्र में नौकरी मिली हो। उन्होंने बताया कि 5 जून को पुलिस की कार्रवाई के बाद अभिषेक को नौकरी से हटा दिया गया।
हनुमान गुफा के पास पानी बेचता था
योग केंद्र के सेवादार सुंदरलाल के अनुसार अभिषेक शुक्ला शिक्षक है। वह अविनाश शुक्ला को योग केंद्र में लेकर आया था। उनके अनुसार राम मंदिर में दान की गणना की नौकरी से पहले अविनाश शुक्ला हनुमान गुफा के पास पानी बेचता था।
अविनाश शुक्ला के भाई अमित का नोटों के साथ वीडियो
अविनाश शुक्ला के भाई अमित ने एक वीडियो बनाया था जिसमें वह नोटों की गड्डियां हाथ में लिए हुए है। इस वीडियो में बैकग्राउंड में एक भोजपुरी गीत ‘पैसा का पूजा होत, पैसा बा भगवान हो..’ का इस्तेमाल किया गया था। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बताया जाता है कि यह वीडियो पिछले साल अगस्त महीने का है। सूत्रों के मुताबिक तब अमित शुक्ला भी अयोध्या में रहता था। चर्चा यह भी है कि वीडियो में उसके हाथ में दिखीं नोटों की गड्डियां चढ़ावे की राशि थी।
पुलिस की रिमांड पर अविनाश
अयोध्या की एक अदालत ने गुरुवार को स्थानीय पुलिस को आरोपी अविनाश शुक्ला की 24 घंटे की रिमांड दी ह। पुलिस उससे राम मंदिर में दान की रकम में हेराफेरी में उसकी कथित भूमिका के बारे में पूछताछ कर रही है। पुलिस का दावा है कि अविनाश शुक्ला दान राशि की गणना प्रक्रिया में अहम पद पर था और उसे गिनती केंद्र के कामकाज की पूरी जानकारी थी।
मामले के जांच अधिकारी अयोध्या के सर्कल ऑफिसर आशुतोष त्रिपाठी ने अविनाश की 48 घंटे की कस्टडी मांगी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि कथित दान चोरी के तरीके को समझने, दूसरे आरोपियों की भूमिका का पता लगाने और बरामदगी की पुष्टि करने के लिए कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी थी। कोर्ट ने 24 घंटे की हिरासत मंजूर की।
सबसे ज्यादा रकम अविनाश के पास मिली
इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ लोगों में से, कथित तौर पर चोरी किए गए पैसे की सबसे बड़ी बरामदगी अविनाश शुक्ला के पास से हुई है। पुलिस ने उसके पास से 20.39 लाख रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर (एक लाख रुपये से ज़्यादा), सोने की चेन, एक अंगूठी और चांदी की चीजें बरामद की हैं। इनका संबंध कथित तौर पर इस मामले से है।
दान की गणना में थी अहम भूमिका
पुलिस ने बताया कि राम मंदिर परिसर के अंदर गणना के हर दौर के बाद दान राशि और सामग्री के मिलान में अविनाश की अहम भूमिका थी। उसकी जिम्मेदारियों की वजह से उसे नकद कलेक्शन तक सीधी पहुंच और कड़ी सुरक्षा वाले गिनती कक्ष के कामकाज की प्रक्रियाओं की समझ थी। पुलिस का मानना है कि इस अधिकार की वजह से वह और अन्य आरोपी लंबे समय तक सिस्टम की कमियों का पता लगाकर उनका फायदा उठा पाए।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अविनाश शुक्ला ने जांचकर्ताओं को बताया कि दान कलेक्शन से चुराई गई रकम को मंदिर परिसर के वॉशरूम में कुछ समय के लिए छिपाया जाता था। शक से बचने के लिए बाद में उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला जाता था।

