अहमदाबाद, ब्यूरो : गुजरात के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र, मेगा सिटी अहमदाबाद के नए पुलिस कमिश्नर के रूप में 1997 बैच के जांबाज, कड़क और बेहद लोकप्रिय आईपीएस (IPS) अधिकारी अनुपम सिंह गहलोत ने कमान संभाल ली है। गृह विभाग के इस फैसले से पूरे पुलिस महकमे और जनता में एक नया उत्साह देखा जा रहा है। अहमदाबाद जैसे संवेदनशील और विशाल क्षेत्र वाले शहर की कमान जब अनुपम सिंह जैसे अनुभवी अधिकारी के हाथों में सौंपी जाती है, तो यह केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं होता, बल्कि अपराधियों के लिए एक सख्त चेतावनी और आम नागरिकों के लिए सुरक्षा का पक्का भरोसा होता है।
शानदार करियर और खाकी का दबदबा
अनुपम सिंह गहलोत गुजरात पुलिस का एक ऐसा नाम हैं, जिसके जिक्र मात्र से ही असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच जाता है। 1997 में आईपीएस बनने के बाद उन्होंने गुजरात के कई जिलों और महानगरों में अपनी अद्वितीय सेवाएं दी हैं।
महानगरों में कमिश्नर पद का लंबा अनुभव: वे गुजरात के लगभग सभी प्रमुख शहरों के पुलिस कमिश्नर रह चुके हैं। राजकोट, वडोदरा और हाल ही में सूरत के पुलिस कमिश्नर के रूप में उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
महत्वपूर्ण विभागों में कुशल नेतृत्व: कमिश्नर पद के अलावा वे भावनगर और पाटन जैसे जिलों में एसपी (SP) के रूप में, वडोदरा रेंज के आईजी (IG) के रूप में और राज्य की सबसे महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी ‘इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (IB) के प्रमुख के तौर पर भी शानदार सेवाएं दे चुके हैं।
टेक्नोलॉजी के उस्ताद और आधुनिक पुलिसिंग के प्रणेता
अनुपम सिंह गहलोत न केवल पारंपरिक पुलिसिंग में माहिर हैं, बल्कि स्मार्ट और आधुनिक टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल में भी हमेशा सबसे आगे रहे हैं।
सूरत में सीसीटीवी नेटवर्क और ड्रोन सर्विलांस: सूरत के कमिश्नर के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शहर को सुरक्षित बनाने के लिए आधुनिक सीसीटीवी कमांड कंट्रोल सिस्टम और ड्रोन तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया।
साइबर क्राइम के खिलाफ सख्त मुहिम: डिजिटल युग में बढ़ते साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए उन्होंने सूरत और वडोदरा में विशेष साइबर सेल को मजबूत किया, जिसकी मदद से लाखों रुपये की धोखाधड़ी के जटिल मामलों को सुलझाया गया।
अपराधियों के लिए ‘काल’ और जनता के लिए ‘मित्र’
एक आईपीएस अधिकारी के रूप में अनुपम सिंह गहलोत की कार्यशैली के दो मुख्य पहलू हैं, जो उन्हें सबसे अलग बनाते हैं:
- संगठित अपराध पर सर्जिकल स्ट्राइक: वे ब्याजखोरों, भू-माफियाओं, ड्रग्स तस्करों और महिलाओं से छेड़छाड़ करने वाले तत्वों के खिलाफ जरा भी ढिलाई नहीं बरतते। सूरत और राजकोट में उनके कार्यकाल के दौरान कई नामी गैंगस्टरों और बूटलेगरों को सलाखों के पीछे भेजा गया। अपराध मुक्त माहौल बनाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।
- कम्युनिटी पुलिसिंग (जन-उन्मुख प्रशासन): दूसरी तरफ, आम नागरिकों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए वे हमेशा सुलभ रहे हैं। ‘पुलिस प्रजा की मित्र है’ के नारे को उन्होंने जमीनी स्तर पर सच कर दिखाया है। रथयात्रा, दिवाली या गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहारों के दौरान वे खुद सड़कों पर उतरकर शांति समितियों के साथ बैठकें करते हैं और आपसी सौहार्द बनाए रखने में हमेशा सफल रहते हैं।
अहमदाबाद में नया दौर: चुनौतियां और उम्मीदें
अहमदाबाद जैसे मेगा सिटी में ट्रैफिक प्रबंधन, साइबर अपराध और आने वाले समय में होने वाली ऐतिहासिक जगन्नाथ जी की रथयात्रा का विशाल सुरक्षा बंदोबस्त नए कमिश्नर के लिए मुख्य चुनौतियां होंगी। लेकिन, अनुपम सिंह गहलोत के पास जो व्यापक अनुभव है, उसे देखते हुए अहमदाबाद पुलिस अब और अधिक मुस्तैद, सतर्क और प्रोएक्टिव नजर आएगी।
अहमदाबाद की जनता को पूरा विश्वास है कि अनुपम सिंह गहलोत के नेतृत्व में शहर की शांति, सुरक्षा और समृद्धि को और मजबूती मिलेगी।
लेखन: विशेष संवाददाता, महानगर मेट्रो

