महाराष्ट्र में नागपुर के नए पुलिस आयुक्त बने आईपीएस विश्वास नांगरे पाटिल के ताजा बयान पर कांग्रेस भड़क गई है, तो वहीं दूसरी तरफ राज ठाकरे ने उन्हें बीजेपी और आरएसएस में शामिल होने की सलाह देते हुए निशाने पर लिया है। पिछले हफ्ते सरकार ने नांगरे को सीपी बनाया था।
मुंबई: महाराष्ट्र में अपनी तेजतर्रार कार्यशैली और फिटनेस के लिए चर्चा में रहने वाली सेलिब्रेटी आईपीएस विश्वास नांगरे पाटिल के बयान पर राजनीति गरमा गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के इवेंट में नांगरे के बयान की कांग्रेस ने जहां जांच की मांग की है तो वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) चीफ राज ठाकरे ने नांगरे को बीजेपी और आरएसएस में शामिल हो जाने को कहा है। विश्वास नांगरे पाटिल 1997 बैच के आईपीएस हैं। उन्हें सरकार ने नागपुर के पुलिस कमिश्नर बनाया है। नांगरे ने हिंदू संमेलन के मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक डॉ. के बी हेडगेवार की प्रशंसा करने की थी। विपक्षी दलों ने उनकी प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
RSS संस्थापक और हिंदुत्व पर बोले थे नांगरे
विश्वास नांगरे पाटिल ने सकल हिंदू समाज’ के एक कार्यक्रम में ‘सकल हिंदू संमेलन’ कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए नांगरे पाटिल ने आरएसएस और उसके संस्थापक हेडगेवार की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। कांग्रेस ने एक्स पोस्ट में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (जिनके पास गृह विभाग भी है) से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या नांगरे पाटिल ने कार्यक्रम में भाग लेने से पहले अनुमति ली थी। ‘ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स’ का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि आईपीएस अधिकारी को ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने से पहले सरकार से मंज़ूरी लेनी चाहिए। पार्टी ने पूछा कि क्या अधिकारी ने ऐसी मंजूरी ली थी और अगर नहीं, तो क्या सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। कांग्रेस की नाराजगी के बाद मनसे चीफ राज ठाकरे ने भी हमला बोला है।
राज ठाकरे ने उठाया सवाल
राज ठाकरे ने तीखा सवाल उठाया है कि किसी सरकारी कर्मचारी, विशेषकर बेहद जिम्मेदार एक पुलिस अधिकारी के लिए इस तरह के कार्यक्रम में शामिल होकर किसी विशेष संगठन के प्रति सार्वजनिक रूप से निष्ठा दिखाना कितना उचित है। नांगरे पाटिल द्वारा दिखाई गई यह दोहरी निष्ठा उनकी निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है और राज ठाकरे ने उनकी आलोचना करते हुए कहा है कि यदि उन्हें संघ से इतना लगाव है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर भाजपा या संघ में शामिल हो जाना चाहिए। गौरतलब को कि 2012 में एमएनएस की रैली में पुलिस को बधाई देने वाले एक कांस्टेबल को तत्कालीन सरकार ने तुरंत अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया था। अब यह सवाल उठ रहा है कि नांगरे पाटिल पर वही नियम क्यों नहीं लागू किया जा रहा है? राज ठाकरे ने यही सवाल उठाया है।
खाकी वर्दी अफसर या फिर प्रचारक: कांग्रेस
विश्वास नांगरे पाटिल पर कांग्रेस भी आक्रामक है। उसने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा है कि क्या वह खाकी वर्दी में कोई अधिकारी हैं या संघ के प्रचारक। आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल को अचानक दोहरी निष्ठा दिखाने की आवश्यकता महसूस हुई है। वे एक पुलिस अधिकारी हैं, इसलिए उनकी निष्ठा केवल पुलिस बल के कर्तव्यों के प्रति होनी चाहिए, लेकिन यहां नांगरे पाटिल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति अपनी निष्ठा दिखाना चाहते हैं। विश्वास नांगरे पाटिल काफी चर्चित ऑफिसर हैं। उनकी अब तक 4 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस पूरे विवाद पर नांगरे की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

