Homeआर्टिकलहर कोई 'VIP' नहीं हो सकता, कुछलोगों को 'जनरल वार्ड' में ही...

हर कोई ‘VIP’ नहीं हो सकता, कुछलोगों को ‘जनरल वार्ड’ में ही रखना पड़ता है.

“लोगों के किरदार बदलनेकी कोशिश न करें, बस अपने दिल की लिस्ट अपडेट कर दें।”
अपेक्षाओं का गला घोंट दीजिए, रिश्ते अपने आप सांस लेने लगेंगे

हम एक ऐसे आधुनिक युग में जी रहे हैं जहाँ लोग अपने घर के दरवाजे पर तो ‘Welcome’ (स्वागतम्) का बोर्ड लगाते हैं, लेकिन अपने दिल के दरवाजे इतने सस्ते और खुले कर देते हैं कि कोई भी ऐरा-गैरा आकर हमारी भावनाओं, गरिमा और मानसिक शांति के साथ खेल जाता है। किसी के दो मीठे बोल या ऊपरी व्यवहार को देखकर हम उसे जान से ज्यादा चाहने लगते हैं, और फिर वही व्यक्ति जब अपने असली रंग दिखाता है, तब हमारा दिल और भरोसा दोनों एक साथ टूट जाते हैं।

मानव स्वभाव की यह एक बड़ी विडंबना है कि हमें खुद वैसे ही स्वीकार होना पसंद है जैसे हम हैं, लेकिन हम सामने वाले व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार बदलना चाहते हैं। हम भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति अपने संस्कारों, परवरिश और अनुभवों का परिणाम है। किसी को बदलने का प्रयास करना यानी पत्थर पर पानी डालने जैसा है।

रिश्तों के इस भ्रम, मोह और तनाव से बाहर निकलने का एक ही सीधा, सटीक और अचूक नियम है हर इंसान को दिल में जगह नहीं दी जा सकती। यह कोई नकारात्मकता नहीं है, बल्कि खुद को मानसिक रूप से अखंड रखने के लिए एक अनिवार्य ‘इमोशनल सर्जरी’ (भावनात्मक सर्जरी) है।
‘बदलने का आग्रह’ छोड़ें, ‘जगह तय करने’ का निर्णय लें

जब आप किसी व्यक्ति को उसकी कमियों और खूबियों के साथ स्वीकार कर लेते हैं, तब आपके मन से अपेक्षाओं का बेकार बोझ हल्का हो जाता है। व्यक्ति को बदलने की जिद हमेशा टकराव और निराशा ही पैदा करती है। स्वीकार करना कोई आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि एक ऐसी मैच्योरिटी (परिपक्वता) है जो आपको सामने वाले व्यक्ति के साथ व्यवहार करने की सही दिशा देती है।

दिल को धर्मशाला मत बनाइए, जहाँ कोई भी आए, अपने नकारात्मक विचारों का कचरा फेंके और चलता बने।

जब आप किसी नकारात्मक, ईर्ष्यालु या स्वार्थी व्यक्ति को अपने जीवन के केंद्र में (VIP स्थान पर) रखते हैं, तब आप अपनी खुशियों की चाबी उसके हाथ में सौंप देते हैं। इंसान का मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता। नीम के पेड़ को चाहे कितना भी पवित्र दूध पिलाया जाए, उसकी कड़वाहट कभी कम नहीं होने वाली। इसलिए, सामने वाले व्यक्ति को ‘रिपेयर’ करने या सुधारने का कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) हमने नहीं लिया है, इस सत्य को स्वीकार कर लीजिए। वे जैसे हैं वैसे ही रहेंगे, बस आपको बुद्धिमानी से यह तय करना है कि अपनी लाइफ में उन्हें कौन सी जगह देनी है।

गुलाब और काँटों का गणित

आप गुलाब के पौधे से यह उम्मीद नहीं रख सकते कि वह काँटे उगाना बंद कर दे। यह उसका स्वभाव है। स्वीकार कर लीजिए कि उसमें काँटे हैं ही। अब आपको तय करना है कि आपको उससे कितनी दूरी पर खड़े रहकर सिर्फ उसकी खुशबू लेनी है, या उसे किस तरह पकड़ना है ताकि काँटा न चुभे।
हमारे फोन में सैकड़ों कॉन्टैक्ट्स सेव होते हैं, लेकिन ‘स्पीड डायल’ में सिर्फ 4-5 खास नाम ही होते हैं। बाकी के कई ऐसे वायरस जैसे होते हैं जिससे फोन हैंग होने लगता है, इसलिए हम उन्हें तुरंत डिलीट या ब्लॉक कर देते हैं। जब हम एक निर्जीव गैजेट को साफ रखने के लिए इतने ‘फिल्टर’ का उपयोग करते हैं, तो फिर इस कीमती जीवन को बेकार के लोगों से हैंग क्यों होने दें? कुछ रिश्तों को जबरदस्ती रिचार्ज करना बंद कर दीजिए, जीवन का नेटवर्क अपने आप सुधर जाएगा।

‘जनरल डिब्बे’ के मुसाफिर

ट्रेन के जनरल डिब्बे या वार्ड में यात्रा करने वाले अजनबी लोगों के साथ हमारा रिश्ता सिर्फ इतना ही होता है कि—”भाई साहब, थोड़ी जगह देना” या “कौन सा स्टेशन आया?”। स्टेशन आते ही वे मुसाफिर अपने-अपने रास्ते निकल जाते हैं। जीवन में कुछ नकारात्मक सहकर्मियों, बेकार की गॉसिप (चुगली) करने वाले रिश्तेदारों या टाइम पास करने वाले दोस्तों को इसी जनरल डिब्बे का मुसाफिर मानिए। उनके साथ सिर्फ औपचारिक (Formal) व्यवहार रखिए बस, ‘कैसे हैं, सब ठीक?’ तक ही सीमित। उन्हें अपने दिल के ‘फर्स्ट क्लास एसी’ (First Class AC) में बिठाने की भूल कभी न करें।
अपने दिल की लिस्ट अपडेट करें

जीवन बहुत छोटा है और हमारी मानसिक ऊर्जा बेहद सीमित है। आज ही शांति से बैठकर आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है कि आपने किस-किस को बिना योग्यता के दिल का ‘VIP पास’ दे रखा है? जो आपकी कीमत नहीं समझते, जिनके होने से आपके मन में उद्वेग, क्लेश और अशांति पैदा होती है, उन्हें आज से ही ‘जनरल वार्ड’ में भेज दीजिए।

सोशल मीडिया की भाषा में समझें तो, हर व्यक्ति ‘Close Friend’ की लिस्ट में नहीं हो सकता, कुछ को सिर्फ ‘Follower’ या ‘Blocked’ लिस्ट में ही रखना पड़ता है। लोगों को वैसे ही स्वीकार करके, उनके गुण-दोष के अनुसार दूरी बना लेना ही इस दुनिया में गरिमापूर्ण और तनावमुक्त जीवन जीने का एकमात्र अनमोल मंत्र है।

अपने खुद के किरदार को पहचानें और अपनी कीमत समझें, क्योंकि आपका समय और आपका दिल दोनों अमूल्य हैं!

दर्शना पटेल (नेशनल मेडलिस्ट, नेशनल अवार्ड से सम्मानित) स्पोर्ट्स टीचर.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments