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महाराष्ट्र कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत, मुंबई अध्यक्ष में भी परिवर्तन तय, किसको-किसको मिल सकती है नई जिम्मेदारी?

महाराष्ट्र और मुंबई कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की संभावना तय है। संगठन को अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महाराष्ट्र इकाई में व्यापक फेरबदल पर अंतिम मंथन कर रही है। चर्चा है कि राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए संगठन में नई ऊर्जा लाना चाहते हैं।

मुंबई: महाराष्ट्र और मुंबई कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की संभावना तय है। संगठन को अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति के तहत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी महाराष्ट्र इकाई में व्यापक फेरबदल पर अंतिम मंथन कर रही है। इस प्रक्रिया में महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला तथा मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के दायित्वों में भी बदलाव सहित संजय दत्त को हरियाणा में प्रभारी बनाए जाने के बाद नाना पटोले , अमित देशमुख, यशोमती ठाकुर, सतेज पाटील, नेट्टा डिसूजा आदि को नई जिम्मेदारियां मिलने के संकेत है।

संगठन में नई ऊर्जा लाने की चर्चा

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी विभिन्न प्रदेशों में चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए संगठन में नई ऊर्जा लाना चाहते हैं। दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज पर उनका फोकस ज्यादा है, इसी कारण प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर मुंबई कांग्रेस के नेतृत्व तक कई स्तरों पर परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाना है। पिछले कुछ समय से मुंबई कांग्रेस के संगठनात्मक कामकाज को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष की आवाज उठती रही हैं।

वर्षा गायकवाड़ का क्या होगा?

वर्षा गायकवाड़ वर्तमान में सांसद हैं और उनकी बहन डॉ. ज्योती गायकवाड़ विधायक। ऐसे में कई अन्य नेताओं को वर्षा के मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहने पर आपत्ति इसलिए भी है क्योंकि पिछले विधानसभा और महानगर पालिका चुनावों में उनकी परफॉर्मेंस बहुत कमजोर रही है, लेकिन वर्षा पूर्व में मंत्री रही है और गुजरात में चुनाव सह प्रभारी भी रही है। ऐसे में राहुल गांधी कांग्रेस में दलित नेतृत्व को ताकतवर बनाना चाह रहे हैं, इसलिए वर्षा गायकवाड़ भले ही मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद पर न रहे, लेकिन कोई अन्य जिम्मेदारी मिलना तय है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए भी कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें पूर्व मंत्री चरण सिंह सप्रा, पूर्व मंत्री नसीम खान, विधायक असलम शेख, सहित फिर से भाई जगताप के नाम हो सकते हैं

नए प्रभारी

केरल में मंत्री बन जाने के बाद रमेश चेन्निथला को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाना तय है। और उनकी जगह किसी ऐसे वरिष्ठ नेता को भेजा जा सकता है जिसे संगठन और चुनाव प्रबंधन सहित गठबंधन की राजनीति का व्यापक अनुभव हो। हालांकि संभावित नामों पर अभी कांग्रेस नेतृत्व ने कोई संकेत नहीं दिया है और विभिन्न नेताओं के नाम केवल राजनीतिक अटकलों का हिस्सा हैं।

साइड कर दिए नेताओं का मिलेगी नई जिम्मेदारी

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मुंबई और महाराष्ट्र में कांग्रेस की विचारधारा, गठबंधन के दांव पेंच और जातिगत व सामाजिक समीकरणों सहित लोकसभा चुनाव के नजरिए से जो नेता नतीजे देने के मामले में महत्वपूर्ण होगा, उसी को जिम्मेदारी मिलेगी। इसी कारण संगठन में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देने पर जोर है जो कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकें और चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। ऐसे चेहरों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले, पूर्व मंत्री सतेज पाटील और यशोमती ठाकुर सहित महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नेट्टा डिसूजा और चरण सिंह सप्रा, नसीम खान आदि को दूसरे प्रदेशों में प्रभारी, सह प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में सचिव जैसी जिम्मेदारियां निभाने के संकेत मिल सकते है।

सकपाल पर भी गिर सकती है गाज

हाल के महीनों में कांग्रेस ने राज्यभर में जिला और शहर स्तर पर भी बड़े पैमाने पर संगठनात्मक नियुक्तियां की हैं, जिससे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को पद पर रखने की चर्चाएं हैं। लेकिन संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया में सकपाल पर भी गाज गिर सकती हैं क्योंकि वे प्रदेश कांग्रेस में समन्वय और कार्यकर्ताओं में उत्साह जगाने सहित नए लोगों को जोड़ने के मामले में राहुल गांधी की आशाओं पर खरे नहीं उतर सके है।

किसकी लग सकती है लॉटरी

अगर प्रदेश अध्यक्ष को भी बदला जाता हैं तो नाना पटोले फिर बन सकते हैं या युवा और अनुभवी मराठा होने के कारण अमित देशमुख की लॉटरी लग सकती है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष सकपाल एआईसीसी में सेक्रेटरी और मध्य प्रदेश के सह प्रभारी रहे हैं एवं अपनी शानदार अंग्रेजी से उन्होंने राहुल गांधी की करीबी भी पाई हुई है। मगर राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राहुल संगठन की मजबूती के मामले में अब किसी भी मापदंड से समझौता करने के मूड में नहीं है। इसलिए वे हर्षवर्धन सपकाल पर भी सख्त फैसला ले सकते हैं।

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