महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर के यशस्वी होने पर राजनीति गरमाई हुई है। संजय राउत ने बागी सांसदों को गद्दार की संज्ञा दी है। छह सांसदों के शिंदे के खेमे में जाने से उद्धव ठाकरे को तगड़ी चोट लगी है। इस टूट के बाद आने वाले दिनों में उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और बढ़ने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में बड़े ‘ऑपरेशन टाइगर’ को श्रीकांत शिंदे ने अंजाम तक पहुंचाया।
एकनाथ शिंदे नहीं बेटे श्रीकांत ने किया ‘ऑपरेशन टाइगर’।(फोटो- नवभारतटाइम्स.कॉम)
मुंबई: बंगाल चुनावों में टीएमसी की हार के बाद विधायकों और सांसदों की बगावत के बाद महाराष्ट्र में सामने आए ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा पूरे देश में हो रही है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना ने जिस ऑपरेशन लोटस की तर्ज पर हुए ऑपरेशन टाइगर को हल्के में लिया। उसने पार्टी को तगड़ी चोट दी है। इंडिया ब्लॉक में 9 सांसदों के साथ अहम पार्टी के तौर पर दर्ज आईयूएमल और जेएमएम के बराबरी पर पहुंच गई है। पहले उद्धव की पार्टी इंडिया गठबंधन की चौथी सबसे बड़ी घटक थी। दूसरी तरफ एनडीए में शिंदे की शिवसेना बीजेपी के बाद चौथी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। दरअसल, महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की प्लानिंग लंबे वक्त से चल रही थी। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भले ही पार्टी प्रमुख है लेकिन इस ऑपरेशन की कमान उनके बेटे श्रीकांत शिंदे ने संभाल रखी थी।
शिवसेना UBT में कर दी बड़ी ‘सर्जरी’
खुद मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में आने वाली कल्याण लोकसभा सीट से श्रीकांत शिंदे 2024 में तीसरी बार जीते थे। पेश से ऑर्थोपेडिक सर्जन श्रीकांत शिंदे ने उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना की सर्जरी करने के मिशन पर जुटे थे। शिंदे ने 6 सांसदों को अपने पाले में लाकर महाराष्ट्र में तहलका मचा दिया है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के सफल होने के बाद चर्चा है कि श्रीकांत शिंदे केंद्र में मंत्री बन सकते हैं लेकिन शिवसेना से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो श्रीकांत नहीं बल्कि धाराशिव (उस्मानाबाद) के सांसद ओमप्रकाश राजे निंबालकर मंत्री बनेंगे। इसके संकेत पूर्व मंत्री और शिवसेना नेता तानाजी सावंत दे चुके हैं, लेकिन इस ऑपरेशन जिस तरीके से श्रीकांत शिंदे ने अपने पिता एकनाथ शिंदे के मार्गदर्शन में अंजाम दिया है। उससे उनका राजनैतिक कद बढ़ गया है। श्रीकांत शिंदे ने छह सांसदों को तोड़ा शिवसेना यूबीटी की कमर तोड़ दी है।
एक के बाद एक धमाके होते रहेंगे। पिछले चार सालों से हम सिर्फ राजनीतिक झटके ही दे रहे हैं। ये तो बस ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। असली कहानी अभी सामने आनी बाकी है। और मुझे बताइए क्या आज का दिन आपके पत्रकारों के लिए काफी नहीं था। दो बड़ी खबरें दोनों ही राष्ट्रीय सुर्खियां बनीं। एक ही दिन में और कितनी खबरें चाहिए आपको। कुछ कल के लिए परसों के लिए या उसके बाद के लिए भी रख लीजिए। मुझे लगता है कि सुबह से लगातार ब्रेकिंग न्यूज देते-देते आप भी थक गए होंगे। और कितना भाग-दौड़ करेंगे। अब आज थोड़ा आराम कर लीजिए, शांत रहिए। कल हम फिर से नई शुरुआत करेंगे।
श्रीकांत शिंदे, सांसद एवं शिवसेना नेता
कैसे हुआ ‘ऑपरेशन टाइगर’ (बड़ी बातें)
ऑपरेशन टाइगर की जिम्मेदारी शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को सौंपी गई थी। पिछले कई महीनों तक बेहद गोपनीय तरीके से चलाए गए इस मिशन का मकसद असंतुष्ट सांसदों को शिंदे खेमे के साथ जोड़ना था।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अलावा केवल चार से पांच लोगों को ही इस पूरी योजना की जानकारी थी।
ऑपरेशन का सबसे अहम चरण दिल्ली में हुआ, 16 जून को शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसद अलग-अलग शहरों से निजी विमानों के जरिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।
सभी नोएडा के एक होटल में ठहरे। अगले दिन 17 जून को श्रीकांत शिंदे, ओमराजे निंबालकर और इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और बागी सांसदों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव उन्हें सौंप दिया।
22 जून को सभी छह सांसद मुंबई पहुंचे और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के साथ प्रेस कांफ्रेंस की।
कौन हैं श्रीकांत शिंदे
4 फरवरी, 1987 को जन्मे श्रीकांत शिंदे ने एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद आर्थोपेडिक्स (MS की डिग्री) में विशेषता हासिल की है।
उनकी उम्र अभी 39 साल है। ये युवा नेता है। परिवार में उनके पिता एकनाथ शिंदे, मां लता शिंदे हैं।
श्रीकांत शिंदे की पत्नी का नाम वृशाली शिंदे है। उनके बेटे का नाम रूद्रांश है।
2022 के बाद सबसे बड़ा झटका
‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत छह सांसदों की बगावत को उद्धव ठाकरे के लिए 2022 के बाद यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। चर्चा है कि आने वाले दिनों में मातोश्री को और झटके लग सकते हैं। इसके संकेत शिवसेना स्थापना दिवस के भाषण में एकनाथ शिंदे ने दिए थे। उन्होंने कहा था कि ये तो ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है। उद्धव ठाकरे के सामने अब पार्टी में टूट के साथ बचे विधायकों और पार्षदों को संभालने की तगड़ी चुनौती है। चर्चा यह भी कि ऑपरेशन टाइगर ने उद्धव ठाकरे को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया है। अब देखना है महाराष्ट्र में एक वक्त पर हिंदुत्व के मोर्चे पर सबसे कट्टर रहे उद्धव ठाकरे किस लाइन पर आगे बढ़ते हैं।

