विशेष प्रतिनिधि, पक्को गुजरात : आज अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की अरबों रुपये की सरकारी प्रॉपर्टीज़ की हालत की एक बहुत ही चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। जनता के टैक्स के पैसे से बने पब्लिक गार्डन, खुले प्लॉट और सरकारी ऑफिस अब आम जनता के लिए नहीं, बल्कि नशेड़ियों और ड्रग एडिक्ट्स के लिए सबसे सेफ जगह (सेफ हेवन) बन गए हैं! यह गंभीर स्थिति साबित करती है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी AC चैंबर से बाहर निकलकर ग्राउंड लेवल पर चेक करने की भी जहमत नहीं उठाते।
प्लॉट से लेकर पंपिंग स्टेशन तक… हर जगह ड्रग पार्टी!
शहर के अलग-अलग इलाकों में मौजूद निगम की प्रॉपर्टीज़ जैसे:
पब्लिक गार्डन: जहां परिवार और बच्चे घूमने आते हैं, वहां रात होते ही असामाजिक तत्व डेरा डाल लेते हैं।
AMTS डिपो और पार्किंग प्लॉट: बड़े-बड़े घेरे वाली ये जगहें नशेड़ियों के छिपने की बेहतरीन जगह बन गई हैं। खुले प्लॉट और पंपिंग स्टेशन: बिना सिक्योरिटी गार्ड वाली इन सरकारी जगहों पर ड्रग्स के सौदागर और नशेड़ी खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
इन जगहों पर अंधेरा होते ही शराब और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन ज़ोरों पर शुरू हो जाता है, जिससे आस-पास रहने वाले स्थानीय लोगों और महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा खतरा है।
सिस्टम की क्रिमिनल इनएक्टिविटी: अधिकारी आंखें क्यों मूंदे हुए हैं?
सबसे बड़ा और ज्वलंत सवाल यह है कि नगर निगम का विजिलेंस डिपार्टमेंट और स्थानीय डिप्टी कमिश्नर यह सब जानते हुए भी अनजान क्यों बने हैं? इन प्रॉपर्टीज़ पर कोई सख्त सिक्योरिटी या सरप्राइज चेकिंग क्यों नहीं होती? क्या अधिकारी किसी बड़ी क्रिमिनल घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?
सरकारी प्रॉपर्टी का ड्रग्स के अड्डे के तौर पर यह इस्तेमाल प्रशासन की नाकामी का सीधा सबूत है। ‘पाको गुजरात’ जनता के पक्ष में खड़ा होकर नगर निगम कमिश्नर से सीधा सवाल पूछता है कि लाखों रुपये सैलरी लेने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कब होगी? नशेड़ियों के इन अड्डों पर निगम का बुलडोजर और कानून का चाबुक कब चलेगा? जनता अब इस लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है!

