पश्चिम बंगाल में बड़े सियासी खेला के बीच महाराष्ट्र में एक बार फिर ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा शुरू हो गई। दावा किया जा रहा है कि एक बार फिर से उद्धव ठाकरे को एकनाथ शिंदे बड़ा झटका दे सकते हैं। लोकसभा में करीब उद्धव के छह सांसद शिंदे के साथ जा सकते हैं। इस चर्चा के बाद महाराष्ट्र में राजनीति फिर गरमा गई है।
मुंबई : पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में बगावत ने महाराष्ट्र में पहले शिवसेना और फिर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की टूट के पुराने घटनाक्रमों को ताजा कर दिया है। चर्चा है कि कोलकाता से नई दिल्ली तक गरमाई राजनीति के बीच उद्धव ठाकरे को फिर से झटका लग सकता है। शिवसेना यूबीटी के 9 लोकसभा सदस्यों में करीब 6 सदस्य शिंदे के साथ जा सकते हैं। महाराष्ट्र में लंबे वक्त से ऑपरेशन टाइगर की चर्चा हो रही है लेकिन अब यह दावा किया जा रहा है कि मानसून सत्र से पहले ऐसा हो सकता है। ऐसा होने पर पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार का संख्याबल लोकसभा में और मजबूत हो जाएगी। अगर एनडीए का संख्याबल 360 होता है तो वह बड़े फैसले ले सकेगी।
महायुति की मजबूती से बढ़ेगा एनडीए का संख्याबल
गौरतलब हो कि संसद के पिछले सेशन में संविधान में बदलाव को मंजूरी देने के लिए जूरूरी खास बहुमत न होने की वजह से NDA को झटका लगा था। एनडीए के सूत्रों का कहना है कि जिन पार्टियों के साथ गठबंधन हो सकता है, उनमें से एक सेना UBT भी हो सकती है। इस संभावना पर तब से बात हो रही है जब से गठबंधन ने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की है, लेकिन अब यह बात जोर पकड़ रही है। उद्धव ठाकरे की पार्टी के लोकसभा में नौ एमपी हैं और उनमें से छह को दूसरी पार्टी में मर्ज होना होगा। डिप्टी CM एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सबसे संभावित विकल्प माना जा रहा है, ताकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत अपनी सदस्यता खोने से बचा जा सके।
ऑनलाइन जुड़े थे उद्धव ठाकरे
हलकों में चर्चा है कि एक बार बगावत झेल चुके उद्धव ठाकरे भी सांसदों को साथ रखने की पूरी कोशिश में जुटे हैं। इंडिया ब्लॉक की दिल्ली में हुई मीटिंग में शिवसेना यूबीटी की तरफ से कोई मौजूद नहीं रहा था। उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और संजय राउत सभी ऑनलाइन जुड़े थे। ऐसी भी संभावना है कि टूट होने की स्थिति में उद्धव कोई बड़ा निर्णय ले सकते हैं। उनके फडणवीस से रिश्ते अच्छे बने हुए है। महाराष्ट्र में उनके दुश्मन नंबर-1 एकनाथ शिंदे ही हैं। शिवसेना यूबीटी सांसदाें में अरविंद सांवत और अनिल देसाई को उद्धव ठाकरे का सबसे विश्वस्त माना जाता है। उधर, एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के पास कुल सात सांसद हैं। अगर उद्धव के सांसद शिवसेना में आते हैं यह संख्या 13 हो जाएगी। इससे शिंदे की केंद्र में ताकत और बढ़ जाएगी।
लोकसभा में कौन-कौन हैं शिवसेना UBT के सांसद?
अरविंद सावंत, मुंबई साउथ
संजय देशमुख, यवतमाल-वाशिम
नागेश बापूराव पाटिल अष्टीकर, हिंगोली
संजय हरिभाऊ जाधव, परभणी
राजाभाऊ वाजे, नासिक
संजय दीना पाटिल, मुंबई नॉर्थ ईस्ट
भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, शिरडी
अनिल देसाई, मुंबई साउथ सेंट्रल
ओमप्रकाश राजेनिंबालकर, उस्मानाबाद
सांसद क्यों छोड़ सकते हैं उद्धव ठाकरे का साथ
राजनीतिक हलकों में उद्धव ठाकरे के सांसदों के एकनाथ शिंदे के साथ जाने के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। इसमें पहला बड़ा कारण है कि सांसदों को विकास कार्यों के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ केंद्र सरकार का साथ मिलेगा। चर्चा है कि अगर ये सांसद शिंदे की शिवसेना में नहीं भी जाते हैं तो वे मुद्दों पर एनडीए के पक्ष में वोटिंग कर सकते हैं। इस सब के अलावा पिछले महीनों में एकनाथ शिंदे ने जिस तरह से महाराष्ट्र में शिवसेना को मजबूत किया है तो उससे सांसदों को लगता है कि उनका सियासी भविष्य सुरक्षित हो सकता है, क्योंकि अपने जमीनी नेटवर्क और पहुंच की वजह से शिंदे राज्य के ज्यादातर हिस्सों में विरोधी गुट को हटाने और उसके क्षत्रपों को जीतने में कामयाब रहे हैं, जबकि उद्धव का असर ज्यादातर मुंबई तक ही सीमित है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने पर शिवसैनिकाें में जोश आया था लेकिन राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की आगे सक्रियता नहीं रहना भी एक बड़ा कारण गिनाया जा रहा है।

