सेंट्रल जिले की साइबर पुलिस ने जयपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मनी म्यूल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जांच में करीब 30 बैंक खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिनका उपयोग साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर और उसे सफेद दिखाने के लिए किया जाता था।
पुलिस ने जयपुर से दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
सेंट्रल जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए बैंक खातों को किराए पर देने और साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले एक शातिर ‘मनी म्यूल’ गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान के जयपुर से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। जांच में अब तक ऐसे करीब 30 फर्जी खातों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिनका इस्तेमाल देश भर में साइबर ठगी के पैसों को घुमाने के लिए किया जा रहा था।
डीसीपी सेंट्रल रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि 22 अप्रैल 2026 को ठगी की एक वारदात हुई थी। जब पीड़ित का मोबाइल फोन अचानक बंद हो गया, उसकी स्क्रीन पूरी तरह काली हो गई और फोन असामान्य रूप से गर्म होने लगा। कुछ देर बाद जब फोन सामान्य हुआ, तो पीड़ित के होश उड़ गए, उसके खाते से बिना किसी अनुमति या ओटीपी के 95 हजार रुपये कट चुके थे। अगले ही दिन 23 अप्रैल को उसी खाते से 96 हजार की एक और ट्रांजैक्शन की गई। कुल 1,91,000 की ठगी होने के बाद पीड़ित ने सेंट्रल जिले के साइबर थाने में शिकायत दी, जिस पर ई-एफआईआर दर्ज की गई।
जांच में सामने आया जयपुर कनेक्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाने की टीम ने जब पैसों के ट्रांसफर (मनी ट्रेल) की तकनीकी और वित्तीय जांच की, तो पता चला कि ठगी की रकम यस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की गई है।
तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस की टीम सीधे जयपुर (राजस्थान) पहुंची और सांगानेर इलाके से दो आरोपियों को दबोच लिया।
आरोपी रोहित कुमार बैरवा (21) और लोकेश महावर (21) सांगानेर, जयपुर का रहने वाले है।
रोहित 2 प्रतिशत कमीशन के लालच में साइबर अपराधियों को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते मुहैया कराता था।
जबकि लोकेश सिंडिकेट का मुख्य संचालक है, जो रोहित जैसे युवाओं से खाते लेकर आगे बड़े साइबर ठगों को सप्लाई करता था।
ऐसे करते थे मनी लॉन्ड्रिंग
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि साइबर ठग सबसे पहले पीड़ितों के मोबाइल फोन और बैंकिंग ऐप्स का अनधिकृत एक्सेस (हैक) हासिल करते थे।
इसके बाद रकम को लोकेश की ओर से मुहैया कराए गए ‘म्यूल अकाउंट्स’ में डाल दिया जाता था।
हैरानी की बात यह है कि इस काली कमाई को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए उन्होंने एक बेहद शातिर तरीका अपनाया हुआ था।
ये लोग डमी खाताधारकों के नाम पर पहले से बैंक या फाइनैंस कंपनियों से लोन (विशेषकर गोल्ड लोन) ले लेते थे और फिर साइबर ठगी से आए पैसों का इस्तेमाल उस लोन को चुकाने में करते थे, ताकि यह पैसा पूरी तरह से वैध और कानूनी दिखाई दे।
पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।

