गांधीनगर के गरीब ठाकोर परिवार की जमीन हड़पने की साजिश का मामला, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने पत्रकार वार्ता में लगाए गंभीर आरोप; पूरे प्रकरण की एसआईटी से जांच कराने की मांग
गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर जिले के खोरज गांव में गरीब ठाकोर परिवार की 100 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की जमीन से जुड़े मामले में नया मोड़ सामने आया है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में दर्ज एफआईआर रद्द कर दी है। कांग्रेस ने इसे न्याय की जीत बताते हुए पुलिस तंत्र और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने राजीव गांधी भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में इस मामले को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
अमित चावड़ा ने कहा कि खोरज के गरीब ठाकोर परिवार की जमीन हड़पने के लिए बड़ा षड्यंत्र रचा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार की पीढ़ियों पुरानी जमीन को कम कीमत पर या जबरन हासिल करने के लिए उच्च पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर अदालज पुलिस थाने और स्थानीय अपराध शाखा के अधिकारियों ने मिलीभगत की। परिवार ने जमीन छोड़ने से इनकार किया तो उन्हें डराने और धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया। हालात ऐसे बन गए कि परिवार को अपना घर छोड़कर कई महीनों तक अज्ञात स्थान पर रहना पड़ा।
मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने का आरोप
चावड़ा ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष जगदीश ठाकोर, विधायक दिनेश ठाकोर और अमृतजी ठाकोर सहित कई नेता मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगने गए थे। लेकिन आरोप है कि 20 से 25 दिनों तक मुख्यमंत्री के पास गरीब परिवार की पीड़ा सुनने के लिए एक मिनट का समय भी नहीं मिला। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में इस तरह की घटना होने पर भी सवाल उठाए और पूछा कि जमीन विवाद में कथित रूप से शामिल अधिकारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है।
द्वारका और सोमनाथ से किसानों को लाने का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डर के कारण द्वारका और सोमनाथ की ओर गए किसानों की स्थिति का पता लगाकर गांधीनगर पुलिस की गाड़ियां सुबह करीब 6 बजे उन्हें जबरन वापस ले आईं। इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद याज्ञिक के कार्यालय के बाहर बिना नंबर प्लेट वाली संदिग्ध गाड़ियों के खड़े होने और परिवार को डराने के प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
कांग्रेस का आरोप है कि परिवार की एक महिला सदस्य को घर से जबरन ले जाकर धमकियों के बीच पहले से तैयार एफआईआर पर हस्ताक्षर करवाए गए। इस एफआईआर में कांग्रेस नेताओं के नाम शामिल करने का भी प्रयास किया गया।
हाईकोर्ट की टिप्पणियों का दिया हवाला, एसआईटी जांच की मांग
अमित चावड़ा ने कहा कि हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणियां की हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए पुलिस तंत्र का दुरुपयोग किया। कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच के लिए तत्काल विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया जाए।
पार्टी ने मांग की कि पुलिस महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी, स्थानीय अपराध शाखा और अदालज पुलिस थाने के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच हो। उनके दूरभाष विवरण और आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद याज्ञिक की टीम की ओर से ऐसे मामलों में पीड़ितों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने की बात भी कही गई।
पीड़ितों के साथ खड़े रहने का कांग्रेस का ऐलान
पत्रकार वार्ता में ओडिशा के प्रभारी लालजीभाई देसाई, कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी, प्रदेश उपाध्यक्ष बिमल शाह, मीडिया समन्वयक एवं प्रवक्ता हेमांग रावल तथा प्रवक्ता डॉ. हिरेन बैंकर मौजूद रहे।
कांग्रेस ने गुजरात की जनता से अपील की कि राज्य में कहीं भी पुलिस अधिकारी, प्रशासन या राजनीतिक नेताओं द्वारा जमीन अथवा संपत्ति पर जबरन कब्जा करने, धमकाने या झूठे मामलों में फंसाने जैसी शिकायत हो तो पार्टी से संपर्क करें। कांग्रेस ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर पीड़ित नागरिकों को कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई में सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
नोट: जमीन कब्जाने, पुलिस की कथित मिलीभगत और धमकियों से जुड़े आरोप पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए हैं।

