अहमदाबाद। शहर के भूदरपुरा इलाके में 9 अक्टूबर को की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर अब नगर निगम के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आरोप है कि अहमदाबाद नगर निगम के अधिकारियों ने गरीब और असहाय परिवारों के घरों को तोड़ते समय कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की। सबसे गंभीर आरोप यह है कि स्थानीय लोगों के पास गुजरात हाईकोर्ट का स्थगन आदेश होने के बावजूद निगम के अधिकारियों ने बुलडोजर चलाकर उनके आशियाने उजाड़ दिए।
स्थानीय लोगों के आरोपों के मुताबिक, नगर निगम की ओर से शाम के समय अचानक नोटिस जारी किया गया और अगले ही दिन सुबह बुलडोजर तथा जेसीबी मशीनों के साथ तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। प्रभावित परिवारों को अपना सामान सुरक्षित निकालने तक का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई में गरीब परिवारों के मकान और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई संपत्ति मलबे में तब्दील हो गई। दीपावली का त्योहार नजदीक होने के बावजूद कई परिवारों के बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
कार्रवाई के बाद नगर निगम ने बदले नियम, अब सात दिन पहले नोटिस देने की बात
भूदरपुरा में हुई कार्रवाई को लेकर विवाद बढ़ने के बाद नगर निगम की ओर से अब नई व्यवस्था की घोषणा की गई है। इसके तहत भविष्य में किसी भी तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले सात दिन का अग्रिम नोटिस देने और कार्रवाई के बाद 48 घंटे के भीतर मलबा हटाने की बात कही गई है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब गरीब परिवारों के घर तोड़े जा रहे थे, तब इन नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया? प्रभावित लोगों का कहना है कि मकान तोड़ने के बाद नियमों में बदलाव करने का क्या औचित्य है। सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि जिन परिवारों के आशियाने पहले ही उजाड़ दिए गए हैं, उन्हें इस नई व्यवस्था से क्या राहत मिलेगी?
प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की उठी मांग
इस पूरे मामले में नगर निगम की कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। मांग की जा रही है कि हाईकोर्ट के स्थगन आदेश की कथित अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन गरीब परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए और दीपावली से पहले उनका पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।
पक्को गुजरात न्यूज की ओर से भी नगर निगम प्रशासन से सवाल उठाया गया है कि यदि भविष्य में तोड़फोड़ से पहले सात दिन का नोटिस देना जरूरी है, तो भूदरपुरा में प्रभावित परिवारों को यह समय क्यों नहीं दिया गया? फिलहाल इस मामले में प्रभावित परिवारों को राहत और पुनर्वास दिलाने की मांग तेज हो रही है।

