महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की। इसमें महाराष्ट्र में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों , नियम तोड़ने वालों और समय पर फाइन न भरने वालों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने ऐसे गाड़ी चालकों को एकमुश्त फाइन भरने पर 20 प्रतिशत की छूट देने के लिए अभय योजना लागू करने का ऐलान किया है।
मुंबई: महाराष्ट्र में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों , नियम तोड़ने वालों और समय पर फाइन न भरने वालों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने ऐसे गाड़ी चालकों को एकमुश्त फाइन भरने पर 20 प्रतिशत की छूट देने के लिए अभय योजना लागू करने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में महाराष्ट्र ट्रैफिक पुलिस चालान अभय स्कीम-2026 को लागू करने को मंजूरी दी गई। मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के नियमों के मुताबिक ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों और गाड़ी मालिकों से फाइन वसूला जाता है।
इस फाइन को वसूलने और वसूलने के लिए राज्य में चालान काटने के लिए 30 जनवरी, 2019 से वन स्टेट वन चालान प्रोजेक्ट और सिस्टम शुरू किया गया है। इसके तहत नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों से ई-चालान के ज़रिए फाइन वसूला जाता है। इस बारे में संबंधित गाड़ी ड्राइवरों को उनके मोबाइल फोन पर चालान भेजे जाते हैं। इस फाइन को वसूलने के लिए ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट कई तरह के कदम उठा रहा है। फिर भी फाइन भरने वालों की संख्या काफी कम है। इस योजना का लाभ तीन चरणों में 30 जनवरी 2020 से चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
इस फाइन को वसूलने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए बढ़ावा देने के लिए देश के दूसरे राज्यों में फाइन की रकम में छूट दी गई है। इसी तरह
राज्य में सेटलमेंट के लिए बकाया फाइन की रकम पर 20 प्रतिशत तक की एक बार की छूट देने का फैसला किया गया है। इसके लिए राज्य में महाराष्ट्र ट्रैफिक पुलिस अभय योजना-2026 को तीन चरणों में लागू किया जाएगा।
पहले चरण में 21 जनवरी, 2026 से 31 अक्टूबर, 2026 तक जारी किए गए और रिकवरी के लिए पेंडिंग सेटलमेंट चालान पर कुल पेंडिंग फाइन की रकम पर 20 परसेंट तक की एक बार की छूट दी जाएगी। इस छूट का समय 30 दिन होगा। दूसरे चरण में 1 नवंबर, 2026 के बाद जारी चालान पर जुर्माना राशि संबंधित गाड़ी मालिक द्वारा चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के अंदर चुका दी जाती है तो ऐसे सभी चालान पर अर्ली पेमेंट डिस्काउंट के तौर पर 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस छूट का समय एक साल होगा।
वहीं तीसरे चरण में 30 जनवरी, 2019 से 20 जनवरी, 2026 तक जारी और रिकवरी के लिए कोर्ट में फाइल किए गए सेटलमेंट के लिए एलिजिबल चालान पर कुल बकाया जुर्माना राशि पर 20 परसेंट तक की छूट दी जाएगी। इस छूट का समय 30 दिन होगा। अभय योजना की समयसीमा खत्म होने के बाद सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के नियम 21 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ लाइसेंस सस्पेंड करने, गाड़ी के ट्रांजैक्शन रोकने, गाड़ी जब्त करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
सिद्धिविनायक ट्रस्ट के राम मेंशन खरीदने पर स्टाम्प ड्यूटी माफ:
सरकार ने मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट द्वारा ‘राम मेंशन’ बिल्डिंग की खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी (मुद्रांक शुल्क) माफ करने का फैसला किया है। मंदिर परिसर के विकास और भक्तों के लिए सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण निर्णय है। श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों को सुविधाएं देने के लिए मंदिर से सटी राम मेंशन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी को खरीदा है। इस संस्था का एरिया 708 स्क्वायर मीटर है। इस संस्था में 13 फ्लैट और सात कमर्शियल जगहें हैं। इन बीस फ्लैटों को खरीदने के लिए 94 करोड़ 11 लाख 65,550 रुपये मंजूर किए गए हैं। इस जमीन का इस्तेमाल भक्तों के लिए लाइन मैनेजमेंट, प्रसादालय, किचन, यात्री निवास और पार्किंग के लिए किया जाएगा। इस खरीद सौदे पर 2 करोड़ 32 लाख 38,700 रुपये की स्टाम्प ड्यूटी देनी होती, लेकिन मंत्रिमंडल की बैठक में इस स्टाम्प ड्यूटी को माफ करने का फैसला किया गया।
पालघर में बनेंगे तीन ग्राम न्यायालय:
पालघर जिले में तीन ‘ग्राम न्यायालय’ स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। तलासरी, मोखाडा और विक्रमगढ़ में ग्राम न्यायालय स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए कुल 15 सहायक पदों यानी हर न्यायालय के लिए 5 पदों को मंजूरी दी गई है।
नागपुर के डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के अंतर्गत आने वाले कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर की जमीन पर एक अंतर्राष्ट्रीय कृषि सुविधा केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इस केंद्र के लिए 644.63 करोड़ रुपये के परियोजना प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार श्रेणी A में आने वाली उन 18 सहकारी समितियों में प्रशासक नियुक्त नहीं किए जाएंगे, जिनका कार्यकाल तो समाप्त हो गया है।
नांदेड़ जिले के मुखेड में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) न्यायालय स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। यह पहले से स्वीकृत लिंक कोर्ट (अतिरिक्त न्यायालय) की जगह लेगा।
सरकार सहकारी संस्थाओं में पांच लोगों को नियुक्त करेगी। जिसका वार्षिक टर्न ओवर पांच सौ करोड़ से ज्यादा है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार रैंक से नीचे का एक अधिकारी और संस्था के काम का अनुभव रखने वाले पांच सदस्यों को नियुक्त किया जाएगा। इसमें से सरकारी अधिकारी को वोट देने का अधिकार नहीं होगा। बाकी चार को बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में वोट देने का अधिकार होगा। इसका फायदा सत्ताधारी दल को गोकुल संघ जैसी संस्थाओं के अध्यक्ष पद पर चुनाव के दौरान मिलेगा। जिन चार नामित सदस्यों को निदेशक मंडल में वोट देने का अधिकार तो होगा, लेकिन वे संगठन के भीतर किसी पदाधिकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह संशोधन जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर लागू नहीं होगा।

