जनता के पैसों से महंगे नाश्ते का भुगतान करने पर उठे सवाल, महापौर ने गुणवत्ता का दिया हवाला, सोशल मीडिया पर लोग ले रहे चुटकी
सूरत। हीरे और कपड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध सूरत शहर में इन दिनों नगर निगम की एक बैठक में परोसे गए भजिये चर्चा का विषय बने हुए हैं। मामला 750 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत वाले बिना तेल के भजियों से जुड़ा है। आरोप है कि नगर निगम की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान इन भजियों का ऑर्डर दिया गया और इसका भुगतान सरकारी खजाने से किया गया। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के खर्च और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, बैठक में परोसे गए भजियों की कीमत 750 रुपये प्रति किलो बताई गई है। आमतौर पर बाजार में भजिये इससे काफी कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं। ऐसे में इतनी अधिक कीमत पर भजिये मंगवाने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं। विवाद बढ़ने पर महापौर ने सफाई देते हुए कहा कि ये बिना तेल वाले भजिये थे और अच्छी गुणवत्ता का भोजन परोसना कोई अपराध नहीं है।
हालांकि, महापौर के इस जवाब के बाद विवाद थमने के बजाय और चर्चा में आ गया। लोगों का कहना है कि मुद्दा भोजन की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि सरकारी धन से किए गए खर्च की उचित दर और पारदर्शिता का है। यदि वास्तव में इतनी कीमत चुकाई गई है तो इसका स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग व्यंग्य करते हुए पूछ रहे हैं कि आखिर इन बिना तेल वाले भजियों में ऐसा क्या खास था कि उनकी कीमत 750 रुपये किलो पहुंच गई। कुछ लोगों ने मजाक में इसे बिना तेल के भजिये बनाने की नई तकनीक बताते हुए इसकी विधि सार्वजनिक करने की मांग तक कर दी।
इस पूरे मामले ने नगर निगम के खर्चों और जनता के कर से जमा होने वाले धन के इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह है कि क्या नगर निगम इस खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करेगा और इतनी अधिक कीमत के पीछे की वजह स्पष्ट करेगा।

